Sawalkote Hydropower Project: सिंधु जल संधि सस्पेंड करने के बाद भारत अपने दुश्मन देश पाकिस्तान को एक और झटका देने जा रहा है। भारत सरकार ने चिनाब नदी पर सावलकोट हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर कॉर्पोरेशन (NHPC) ने प्रोजेक्ट के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है, जिससे जहां भारत को बड़ा फायदा होगा, वहीं पाकिस्तान को नुकसान होगा, जो आतंकवादियों को पनाह देने और आतंकवाद को स्पॉन्सर-सपोर्ट करने की सजा होगा।
9 साल में प्रोजेक्ट पूरा करने का टारगेट
बता दें कि सावलकोट हाइड्रो प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में लगेगा, जिसके लिए 5129 करोड़ की लागत वाला टेंडर जारी हुआ है। वहीं पूरा प्रोजेक्ट लगने में करीब 31380 करोड़ खर्च होंगे और इसे पूरा होने में करीब 9 साल लग सकते हैं। प्रोजेक्ट लगाने के लिए 847 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगा, जिसके लिए 2 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें से सवा लाख से ज्यादा पेड़ अकेले रामबन के कटेंगे। इस प्रोजेक्ट से रामबन के 13 गांवों की जमीन का अधिग्रहण होगा और 1500 परिवार प्रभावित होंगे।
🚨India started Rs 5,129 crore worth Sawalkote Hydroelectric Project on the River Chenab in Jammu and Kashmir. pic.twitter.com/bPaMRupWW4
— India & The World (@IndianInfoGuid) February 8, 2026
180 दिन में शुरू करना है निर्माण कार्य
बता दें कि प्रोजेक्ट का प्रस्ताव वर्ष 1984 से तैयार है, लेकिन विवादों के चलते प्रोजेक्ट मंजूर नहीं हो रहा था। अब मोदी सरकार ने इसे हरी झंडी दी है और पिछले साल 2025 में पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिली थी और साल 2026 शुरू होते ही इसका टेंडर निकाल दिया गया है। प्रोजेक्ट को बनाने के लिए कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं और बोली 12 से 20 मार्च तक लगाई जा सकेगी, जिसके बाद 180 दिन के अंदर निर्माण शुरू करना होगा। प्रोजेक्ट को 3285 दिन में पूरा करना है।
192 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनेगा
बता दें कि सावलकोट प्रोजेक्ट के तहत 192.5 मीटर ऊंचा रोलर-कॉम्पैक्टेड कंक्रीट बांध बनेगा, जिसे साल 2034 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं यह प्रोजेक्ट केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। वहीं मोदी सरकार ने पाकल दुल और किरू प्रोजेक्ट को भी दिसंबर 2026 तक और क्वार प्रोजेक्ट को मार्च 2028 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। पाकल दुल हाइड्रो प्रोजेक्ट चिनाब बेसिन पर बन रहा सबसे बड़ी प्रोजेक्ट है, जिसके तहत 167 मीटर ऊंचा बांध बन रहा है।
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8000 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी
बता दें कि सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से 1856 मेगावाट और प्रतिवर्ष करीब 8000 मिलियन यूनिट बिल पैदा करने का टारगेट है। पहले चरण में 1406 मेगावाट और दूसरे चरण में 450 मेगावाट बिजली पैदा करने का टारगेट है। पहले फेज के लिए वन विभाग की मंजूरी मिल चुकी है। प्रोजेक्ट को एक ही पैकेज में तैयार किया जाना है। इसके तहत डाइवर्जेंट टनल, कोफर डैम, मांडिया नाला, सड़क निर्माण, राइट बैंक स्पाइरल टनल, एक्सेस टनल और डैम से जुड़े अन्य निर्माण कार्य किए जाएंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से खड़ा करना है।
भारत का एनर्जी सेक्टर और मजबूत होगा
बता दें कि सावलकोट हाइड्रो प्रोजेक्ट से भारत का एनर्जी सेक्टर मजबूत होगा। देश का पॉवर ग्रिड मजबूत होगा। जम्मू-कश्मीर की इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत पूरी होगी और पूरे उत्तर भारतर को बिजली की सप्लाई संभव होगी। चिनाब नदी की क्षमताओं का फायदा उठाया जाना संभव होगा। देश के जल संसाधन का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा। वहीं चिनाब नदी के पानी को पाकिस्तान तक जाने से रोकना है। चिनाब के पानी का प्रवाह पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए भारत एक नहर के बनाने की योजना पर भी काम कर रहा है।
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प्रोजेक्ट से पाकिस्तान को क्या नुकसान होगा?
बता दें कि सावलकोट हाइड्रो प्रोजेक्ट से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान होगा। चिनाब नदी पर पहले से 3 बांध दुलहस्ती, बगलिहार और सलाल बने हैं. अब सावलकोट बांध बनने से पाकिस्तान की लाइफ लाइन टूट जाएगी। क्योंकि पाकिस्तान को सिंधु बेसिन की नदियों से करीब 75 प्रतिशत पानी मिलता है और सिंधु बेसिन की नदियां भारत से गुजरती हैं, वहीं इस 75 प्रतिशत पानी से पाकिस्तान की 90 प्रतिशत खेती की सिंचाई होती है, लेकिन आतंकवाद के कारण भारत ने पाकिस्तान को सजा देने का संकल्प लिया है।
सावलकोट बांध बनने से पाकिस्तान तक नदी के जल का प्रवाह बाधित होगा, जिससे रबी सीजन की फसलें प्रभावित होगी। बांध बनने के बाद भारत पानी रोकेगा तो सूखा और छोड़ेगा तो बाढ़ का खतरा है। सूखे के कारण कृषि भूमि बंजर हो सकती है। फसलें प्रभावित होने से खाद्य संकट गहराएगा और अर्थव्यवस्था डगमगाएगी। चिनाब नदी पर पाकिस्तान में बने पॉवर प्रोजेक्ट की उत्पादन क्षमता कम होगी, जिससे बिजली संकट गहराएगा। मछलियों का प्रवास घटने से लोग मछली पालन नहीं कर पाएंगे और जैव विविधित को नुकसान पहुंचेगा। इसके अलाव दोनों देशों के बीच तनाव और दुश्मनी बढ़ेगी।










