Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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अगर आपको लग रहा था कि मार्च की विदाई के साथ ही चिलचिलाती गर्मियां शुरू हो जाएंगी, तो थोड़ा ठहरिए. कुदरत ने अप्रैल के लिए कुछ और ही प्लान बना रखा है. उत्तर भारत एक बार फिर मौसम के एक बड़े और चुनौतीपूर्ण बदलाव के लिए तैयार हो रहा है. मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, एक पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देने वाला है, जो 3 से 5 अप्रैल 2026 के बीच कई राज्यों में भारी बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि लेकर आएगा.
इस वीकेंड से ही मौसम का मिजाज बदलना शुरू हो जाएगा. मैदानी इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस गुजरात-राजस्थान सीमा के करीब से गुजरेगा और उत्तर-पश्चिम भारत को पार करते समय और भी तीव्र हो जाएगा.
पहाड़ी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के साथ-साथ पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर फिर से शुरू हो सकता है. वहीं, मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-NCR में भयंकर गरज के साथ छींटे और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी हवाएं चलने की उम्मीद है. वहीं, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी खराब मौसम का खतरा है. इसके बाद यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ओडिशा और पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ सकता है.
⚠️ IMD Weather Alert !
— India Meteorological Department (@Indiametdept) April 2, 2026
Two active western disturbances expected to impact Northwest India this week, with peak intensity on April 3rd–4th and again on April 7th.
🌧️ Heavy rainfall likely in Kashmir Valley
🌩️ Hailstorms expected on April 3rd & 4th
Stay safe and take necessary… pic.twitter.com/gxOzHI7QDA
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे बड़ा असर तापमान पर पड़ेगा. बारिश के बाद पारे में गिरावट आएगी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन 2026 की गर्मियों का आगाज और आगे खिसक जाएगा. जानकारों का मानना है कि 2026 की गर्मी भी 2024 के रिकॉर्ड तोड़ तापमान के बराबर रह सकती है, लेकिन इस बार शुरुआत में देरी हो रही है.
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मौसम का यह मिजाज किसानों के लिए किसी झटके से कम नहीं है. इस समय रबी की फसलें (जैसे गेहूं और सरसों) पकने की कगार पर हैं या कटाई के दौर में हैं. ऐसे में भारी बारिश और ओलावृष्टि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. हालांकि, मिट्टी में नमी बढ़ने से कुछ क्षेत्रों को लाभ भी होगा, लेकिन कुल मिलाकर यह खेती के लिए चुनौतीपूर्ण समय है.
दैनिक मौसम परिचर्चा (02.04.2026)
— India Meteorological Department (@Indiametdept) April 2, 2026
एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 02-05 अप्रैल के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है, जिसमें 03 और 04 अप्रैल को चरम गतिविधि के साथ ओलावृष्टि भी हो सकती है।
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कैस्पियन या भूमध्य सागर में बनने वाले तूफानों को वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कहा जाता है. इन तूफानों की वजह से उत्तर पश्चिम से ठंडी हवा चलती है. इसके चलते उत्तर पश्चिमी इलाकों में बिना मौसम की बारिश होती है.
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