क्या है भारत का FCRA बिल? जिससे अमेरिकी सांसद को लगी मिर्ची, बताया- ‘ईसाइयों पर हमला’
राइली मूर ने बिल की आलोचना करते हुए इसे ईसाई समुदाय के खिलाफ कदम बताया है. उन्होंने दावा किया कि अगर ये विधेयक संशोधन के साथ पारित होता है तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में भी चिंता का विषय बन सकता है.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Aug 5, 2026 08:10
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Aug 5, 2026 08:10
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भारत की संसद में मानसून सत्र के बीच केंद्र सरकार द्वारा कई विधेयक पेश किए गए और भविष्य में भी पेश करने की योजना है. सत्र के दौरान कुछ संशोधन विधेयकों को भी पेश किया जा रहा है, जिसमें से एक फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) भी शामिल है. अब इस बिल की चर्चा अमेरिका तक पहुंच गई है. अमेरिका की ट्रंप प्रशासन में सांसद राइली मूर ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे ईसाइयों के खिलाफ हमला बताया है. ये जानकर आपको भी जरूर हैरानी हुई होगी कि आखिर भारत की संसद में पेश हुए इस बिल से आखिर अमेरिकी सांसद को क्यों मिर्ची लगी है, तो आइए जानते हैं आखिर क्या है FCRA बिल?
अमेरिकी सांसद को क्यों लगी मिर्ची?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) भारत में विदेशी फंडिंग को कंट्रोल करने वाला एक कानून है. संसद के मानसून सत्र के दौरान कानून में कुछ बदलावों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश किया गया. जिसपर अब अमेरिकी सांसद ने आपत्ति जताई है. राइली मूर ने बिल की आलोचना करते हुए इसे ईसाई समुदाय के खिलाफ कदम बताया है. उन्होंने दावा किया कि अगर ये विधेयक संशोधन के साथ पारित होता है तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में भी चिंता का विषय बन सकता है.
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Christians have been in India since St. Thomas the Apostle traveled to the Malabar Coast just decades after the resurrection of our Lord Jesus Christ.
But despite this long Christian history, India’s Parliament is considering amending Foreign Contribution Regulation Amendment…
दरअसल, FCRA अधिनियम 2010 के मुताबिक गैर-सरकारी संगठन (NGO), धार्मिक संस्थाएं, चैरिटेबल ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान और अन्य संगठनों को विदेशी सोर्सेज से मिलने वाला फंड पर नजर रखी जाती है और इसके लेन-देन को निर्धारित किया जाता है. मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी चंदा लेने के लिए गृह मंत्रालय से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जिसे हर पांच साल में रीन्यू कराना होता है.
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कानून में अब क्या किए जा रहे बदलाव?
सरकार द्वारा पेश संशोधन विधेयक में सबसे अहम प्रावधान एक अथॉरिटी की नियुक्ति करना है. इस अथॉरिटी को विदेशी चंदे और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार देने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, जिन संस्थाओं को पिछले दो वित्तीय वर्षों में 10 लाख रुपये से कम विदेशी फंड मिला है या जिन्होंने उससे कम राशि का उपयोग किया है, उनके लिए FCRA रजिस्ट्रेशन के रीन्यू प्रोसेस को लेकर नई शर्तें तय की गई हैं. साथ ही विदेशी फंड को दूसरे संगठनों को ट्रांसफर करने पर सख्त प्रतिबंध, धन के उपयोग की समय-सीमा और वेबसाइट, सोशल मीडिया और प्रोजेक्ट्स से जुड़ी विस्तृत जानकारी देने जैसे नए नियम शामिल किए गए हैं.