क्या है भारत का FCRA बिल? जिससे अमेरिकी सांसद को लगी मिर्ची, बताया- 'ईसाइयों पर हमला'

राइली मूर ने बिल की आलोचना करते हुए इसे ईसाई समुदाय के खिलाफ कदम बताया है. उन्होंने दावा किया कि अगर ये विधेयक संशोधन के साथ पारित होता है तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में भी चिंता का विषय बन सकता है.

US lawmaker Riley Moore

भारत की संसद में मानसून सत्र के बीच केंद्र सरकार द्वारा कई विधेयक पेश किए गए और भविष्य में भी पेश करने की योजना है. सत्र के दौरान कुछ संशोधन विधेयकों को भी पेश किया जा रहा है, जिसमें से एक फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) भी शामिल है. अब इस बिल की चर्चा अमेरिका तक पहुंच गई है. अमेरिका की ट्रंप प्रशासन में सांसद राइली मूर ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे ईसाइयों के खिलाफ हमला बताया है. ये जानकर आपको भी जरूर हैरानी हुई होगी कि आखिर भारत की संसद में पेश हुए इस बिल से आखिर अमेरिकी सांसद को क्यों मिर्ची लगी है, तो आइए जानते हैं आखिर क्या है FCRA बिल?

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अमेरिकी सांसद को क्यों लगी मिर्ची?


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) भारत में विदेशी फंडिंग को कंट्रोल करने वाला एक कानून है. संसद के मानसून सत्र के दौरान कानून में कुछ बदलावों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश किया गया. जिसपर अब अमेरिकी सांसद ने आपत्ति जताई है. राइली मूर ने बिल की आलोचना करते हुए इसे ईसाई समुदाय के खिलाफ कदम बताया है. उन्होंने दावा किया कि अगर ये विधेयक संशोधन के साथ पारित होता है तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में भी चिंता का विषय बन सकता है.

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आखिर क्या है FCRA बिल?


दरअसल, FCRA अधिनियम 2010 के मुताबिक गैर-सरकारी संगठन (NGO), धार्मिक संस्थाएं, चैरिटेबल ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान और अन्य संगठनों को विदेशी सोर्सेज से मिलने वाला फंड पर नजर रखी जाती है और इसके लेन-देन को निर्धारित किया जाता है. मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी चंदा लेने के लिए गृह मंत्रालय से रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जिसे हर पांच साल में रीन्यू कराना होता है.

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कानून में अब क्या किए जा रहे बदलाव?


सरकार द्वारा पेश संशोधन विधेयक में सबसे अहम प्रावधान एक अथॉरिटी की नियुक्ति करना है. इस अथॉरिटी को विदेशी चंदे और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार देने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, जिन संस्थाओं को पिछले दो वित्तीय वर्षों में 10 लाख रुपये से कम विदेशी फंड मिला है या जिन्होंने उससे कम राशि का उपयोग किया है, उनके लिए FCRA रजिस्ट्रेशन के रीन्यू प्रोसेस को लेकर नई शर्तें तय की गई हैं. साथ ही विदेशी फंड को दूसरे संगठनों को ट्रांसफर करने पर सख्त प्रतिबंध, धन के उपयोग की समय-सीमा और वेबसाइट, सोशल मीडिया और प्रोजेक्ट्स से जुड़ी विस्तृत जानकारी देने जैसे नए नियम शामिल किए गए हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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