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देश

Explainer: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बिल 2026 पर क्यों बढ़ा विवाद, जानें क्या है CAPF बनाम IPS की लड़ाई?

Central Armed Police Forces Bill 2026: केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बदले में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके बिल को संसद में पास कराया जाना है। अगर बिल संसद में पास हो गया तो सशस्त्र बलों में IPS कैडर के लिए पद रिजर्व हो जाएंगे, लेकिन इस विवाद भी छिड़ा है, आइए जानते हैं क्यों?

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Written By: Kumar Gaurav Updated: Mar 23, 2026 12:27
Central Armed Police Forces Bill 2026
सशस्त्रों बलों की भर्ती और नियुक्तियों को कंट्रोल करने की कोशिश केंद्र सरकार की है।

Central Armed Police Forces Bill 2026: भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) इस समय एक बड़े विवाद के केंद्र में हैं। लगभग 10 लाख जवानों वाले इन बलों में अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर लंबे समय से असंतोष रहा है। अब यह मुद्दा तब और गरम हो गया है जब केंद्र सरकार ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ को राज्यसभा में पेश करने जा रही है। इस बिल को लेकर सदन में विरोध की पूरी संभावना जताई जा रही है।

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लंबी कानूनी लड़ाई चल रही

CAPF के कैडर अधिकारी, जो UPSC के जरिए सीधे भर्ती होते हैं, पिछले करीब 10 साल से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे थे। उनकी प्रमुख मांग थी कि उन्हें Organised Group A Service (OGAS) का दर्जा मिले, जिससे उन्हें समय पर प्रमोशन और बेहतर करियर ग्रोथ मिल सके। 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CAPF अधिकारियों को OGAS का दर्जा दिया जाए और IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाए। साथ ही गृह मंत्रालय को सेवा नियमों की समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया।

नया विधेयक: सरकार का रुख

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब गृह मंत्रालय, नया कानून लेकर आया है। सरकार का कहना है कि यह कानून प्रशासनिक स्पष्टता और बेहतर समन्वय के लिए जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें यह प्रावधान किया गया है कि सभी CAPF में इंस्पेक्टर जनरल (IG) रैंक के कुल पदों में 50 प्रतिशत, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) रैंक के कम से कम 67 प्रतिशत पद तथा विशेष महानिदेशक (Special DG) और महानिदेशक (DG) रैंक के सभी पद भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों से प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरे जाएंगे। अब तक इन पदों पर नियुक्तियां कार्यकारी आदेशों के आधार पर की जाती थीं, लेकिन यह विधेयक इन प्रावधानों को कानूनी रूप से स्थापित करेगा।

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क्या है बिल पर विवाद की वजह?

CAPF कैडर अधिकारियों का मानना है कि यह बिल उनके करियर पर सीधा असर डालेगा। इससे उनके प्रमोशन के अवसर और कम हो जाएंगे जबकि सुप्रीम कोर्ट ने जहां IPS की प्रतिनियुक्ति कम करने को कहा था, वहीं सरकार नया कानून लाकर उसी व्यवस्था को और मजबूत कर रही है। इसके अलावा, कैडर अधिकारियों का तर्क है कि वे लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम करते हैं, इसलिए नेतृत्व के पदों पर उनका हक ज्यादा होना चाहिए। बता दें कि CAPF में कुल लगभग 10 लाख जवान हैं। ग्रुप ‘A’ कैडर अधिकारियों की संख्या करीब 13000 है। कुल रिक्तियां लगभग 93000 बताई जाती हैं। पहली पदोन्नति में 10 साल से अधिक का समय लग जाता है।

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आज राज्यसभा में क्या होगा?

आज यह विधेयक राज्यसभा में पेश होने के लिए सूचीबद्ध है और इसे लेकर विपक्ष के साथ-साथ कई अन्य पक्षों से विरोध की संभावना है। सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और बेहतर प्रशासन से जोड़कर पेश करेगी । जबकि विरोध करने वाले इसे कैडर अधिकारियों के अधिकारों पर असर डालने वाला कदम मान रहे हैं। यह विवाद सिर्फ एक कानून का नहीं, बल्कि CAPF के भीतर संतुलन, अवसर और मनोबल का मुद्दा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विधेयक किस रूप में आगे बढ़ता है और इसका असर सुरक्षा बलों की संरचना पर क्या पड़ता है।

First published on: Mar 23, 2026 12:02 PM

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