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Explainer: क्या है बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी? 76 साल में दो बार क्यों करनी पड़ी थी रद्द, विजय चौक पर भारतीय सेना आज मनाएगी जश्न

आज राष्ट्रपति भवन के पास बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी मनाई जानी है। इस आयोजन की अध्यक्षता राष्ट्रपति करते हैं। इस मौके पर थल, जल और वायु सेना जश्न मनाती है। इसकी शुरुआत 1950 से हुई थी। आखिर इसमें क्या होता है, कब यह कार्यक्रम रद्द हो सकता है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Author Written By: Raghav Tiwari Updated: Jan 29, 2026 14:38

Beating Retreat 2026: दिल्ली में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का शानदार जश्न मनाया गया था। पूरी दुनिया ने भारतीय सेना का शौर्य देखा। कर्तव्य पथ पर परेड ने हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। लेकिन गणतंत्र दिवस का समारोह 26 जनवरी तक ही सीमित नहीं था। इस समारोह का समापन आज बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ होगा।

साल 1950 में भारत में संविधान लागू हुआ था। तब भारत पूर्ण गणतंत्र बना था। उस साल महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस फिलिप राजकीय यात्रा पर भारत आए थे। उसी समय पहली बार बीटिंग रिट्रीट समारोह मनाया गया था। तब से यह समारोह भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक वार्षिक कार्यक्रम बन गया है। बीटिंग रिट्रीट गणतंत्र दिवस के समापन का सूचक होता है।

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बीटिंग रिट्रीट की अध्यक्षता तीनों सेनाओं के अध्यक्ष यानी राष्ट्रपति करते हैं। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के दौरान थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड पारंपरिक धुन के साथ मार्च करते हैं। यह एक तरह से सेना का बैरक में लौटने का प्रतीक होता है। हर साल गणतंत्र दिवस के बाद 29 जनवरी को रायसीना हिल्स और विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी मनाई जाती है। बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी में गणतंत्र दिवस आयोजनों के आधिकारिक रूप से समापन की घोषणा की जाती है।

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क्या होता है बीटिंग रिट्रीट में

बीटिंग रिट्रीट का शब्दिक अर्थ होता है- सेना का बैरक में वापसी। एक तरह से बीटिंग द रिट्रीट भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के समापन का सूचक है। हर साल 29 जनवरी की शाम को बीटिंग द रिट्रीट का आयोजन किया जाता है। आयोजन की शुरुआत में तीनों सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन करते हैं। कार्यक्रम में लोकप्रिय मार्चिंग धुनें, ड्रमर का एकल प्रदर्शन (ड्रमर्स कॉल) जैसी कला का प्रदर्शन होता है।

महात्मा गांधी की प्रिय धुनों में से एक ड्रमर्स द्वारा एबाइडिड विद मी बजाई जाती है। इस दौरान ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्‍स बजाई जाती हैं। फिर रिट्रीट का बिगुल वादन होता है। जब बैंड मास्‍टर राष्‍ट्रपति के समीप जाते हैं, बैंड वापस ले जाने की अनुमति मांगते हैं, तब समापन समारोह पूरा माना जाता है। राष्ट्रपति से परमिशन मिलने के बाद बैंड मार्च लौटते समय जहां से अच्‍छा धुन बजाते हुए जाते हैं। इसके बाद राष्‍ट्रीय ध्‍वज को उतार लिया जाता हैं। राष्‍ट्रगान गाया जाता है। इसी तरह गणतंत्र दिवस समारोह का पूरी तरह समापन हो जाता है।

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2 बार कब रद्द हुई सेरेमनी

देश ने इस साल 77वां गणतंत्र दिवस मनाया। पिछले 76 सालों में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी केवल 2 बार रद्द हुई थी। पहले बार 2009 में, उस समय भारत के 8वें राष्ट्रपति आर वेंकटरमन का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था। इस वजह से बीटिंग रिट्रिट को रद्द करना पड़ा था। आर वेंकटरमन का कार्यकाल 1987 से 1992 तक रहा था।

इसके बाद साल 2001 में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी रद्द हुई थी। 26 जनवरी 2001 को गुजरात में भयंकर भूकंप आया था। इसके अलावा अमृतसर में वाघा-अटारी सीमा पर साल 2019 में बीटिंग रिट्रीट को रद्द कर दिया गया था। उस समय भारत का जाबाज एक हादसे में पैराशूट से पाकिस्तानी इलाके में नीचे आए थे। पाकिस्तान ने उन्हें कब्जे में लिया था। भारतीय अर्धसैनिक बल (बीएसएफ) उस समय बीटिंग रिट्रीट को रद्द करने का फैसला लिया था।

First published on: Jan 29, 2026 02:38 PM

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