Facts of Union Budget: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी 2026 दिन रविवार को केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जिसके लिए संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हो जोएगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा, वहीं बजट सत्र 2 चरणों में होगा, जिसमें एक चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा. बजट में सरकार के काम-काज का लेखा-जोखा, पिछले वित्त वर्ष का आय-व्यय, घाटे, खर्चों, टैक्स, भविष्य की योजनाओं और प्रोजेक्टों का ब्यौरा होता है. आज हम आपको भारत के केंद्रीय बजट से जुड़ी रोचक जानकारियां दे रहे हैं, जिनके बारे में आप जानते नहीं होंगे…
कहां से आया बजट शब्द?
बता दें कि बजट फ्रेंच लैंग्वेज के शब्द बजेट से बना है, जिसका मतलब होता है ब्रीफकेस, जिसे ऑफिस से जुड़े जरूरी कागजात रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि आजकल ब्रीफकेस की जगह कई तरह के बैग ट्रेंड में आ गए हैं, लेकिन सरकारी ऑफिसों में फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट रखने के लिए आज भी ब्रीफकेस टाइप बैग इस्तेमाल किए जाते हैं. ऐसे ही एक ब्रीफकेस में बजट से जुड़े दस्तावेज लेकर वित्त मंत्री संसद आते हैं, हालांकि आजकल कागजों की जगह टैब ने ले लिया है, लेकिन वित्त मंत्री के हाथ में टैब भी खास ब्रीफकेस में नजर आता है.
क्या है हलवा सेरेमनी?
केंद्रीय बजट पेश करने से पहले हलवा सेरेमनी का चलन है, जो बजट को फाइनल टच देने से पहले निभाई जाती है. बजट तैयार करने की प्रक्रिया कई दिन चलती है, जिसके लिए एक टीम बनाई जाती है. जब तक बजट तैयार नहीं हो जाता, यह टीम वित्त मंत्रालय में ही रहती है और इस दौरान उनके पास उनके फोन भी नहीं होते हैं. इतने दिन की मेहनत के बाद जब बजट को फाइनल करने का दिन आता है तो उस दिन वित्त मंत्रालय में हलवा बनाकर बांटा जाता है, जिसका एक मतलब बजट की खुशी हो तो दूसरा मतलब बजट पेश करने की तैयारी होता है.
कब पेश हुआ पहला बजट?
बता दें कि भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था, लेकिन इस बजट को किसी भारतीय ने नहीं, बल्कि स्कॉटलैंड के पॉलिटिशियन और इकोनॉमिस्ट जेम्स विल्सन ने पेश किया था. वहीं आजादी के बाद स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था, जो एक अंतरिम बजट था. इस बजट को वित्त मंत्री आर. के. शणमुखम चेट्टी ने पेश किया था, जिसे साढ़े 7 महीने यानी 31 मार्च 1948 तक के लिए पेश किया गया था.
सबसे लंबा और सबसे छोटा बजट?
बता दें कि देश का सबसे छोटा बजट 1977 में पेश हुआ था, जो सिर्फ 800 शब्दों का था. इस बजट को उस समय के वित्त मंत्री हिरुभाई मुलजीभाई पटेल ने पेश किया था. समय के हिसाब से अब तक का सबसे लंबा बजट 1 फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया था, जो रिकॉर्ड है, क्योंकि उन्होंने 2 घंटे 42 मिनट तक बजट पेश किया था. वहीं शब्दों के हिसाब से सबसे लंबा बजट 1991 में 18650 शब्दों का पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेश किया था, वहीं उनके बाद अरुण जेटली में 18604 शब्द थे और 2018 में इसे पेश करने में एक घंटा 49 मिनट लगे.
सबसे ज्यादा बार बजट पेश किए
बता दें कि आजादी के बाद आज तक सबसे ज्यादा 10 बार बजट मोरराजी देसाई ने 1962 से 1969 के बीच पेश किया. उनके बाद पी. चिदम्बरम ने 9 बार, प्रणब मुखर्जी ने 8 बार, यशवंत सिन्हा ने 8 बार और डॉ. मनमोहन सिंह ने 6 बार बजट पेश किया. वहीं वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 8 बार बजट पेश करके प्रणब मुखर्जी, यशवंत सिन्हा और मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ दिया है और अब एक फरवरी 2026 को 9वीं बार बजट पेश करके चिदंबरम के बराबर आ जाएंगी.
बजट पेश करने वाली पहली महिला
बता दें कि देश का बजट पेश करने वाली पहली महिला पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1970 में केंद्रीय बजट पेश किया था और उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए भी वित्त मंत्री की भूमिका अस्थायी रूप से निभाई थी. इंदिरा गांधी के अलावा 1958 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने और 1987 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए भी वित्त मंत्री की भूमिका निभाते हुए केंद्रीय बजट पेश किया था.
1999 में बदला बजट का टाइम
बता दें कि 1999 तक केंद्रीय बजट फरवरी महीने के आखिरी दिन शाम 5 बजे पेश किए जाने की परंपरा था, लेकिन 1999 में उस समय के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट पेश करने का समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया था. साल 2017 में एक और परंपरा बदली और बजट फरवरी के आखिरी तारीख की बजाय पहली तारीख को पेश किया जाने लगा.
तब से अब तक बजट एक फरवरी को पेश किया जा रहा है. इस बीच साल 2017 में ही रेल बजट और आम बजट को मर्ज कर दिया गया, जबकि इससे पहले रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किया जाता था. 92 साल तक दोनों बजट को अलग-अलग पेश करने की परंपरा चली, जो साल 2017 में टूट गई.
बजट की भाषा और फॉर्मेट
बता दें कि 1955 तक भारतीय बजट अंग्रेजी भाषा में ही छपता था और पेश किया जाता था, लेकिन कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहे सीडी देशमुख ने बजट को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी छापने की परंपरा शुरू कराई. साल 2021 में कोरोना काल के कारण पेपरलेस बजट पेश किया था और सभी को बजट की डिजिटल कॉपी दी गई थी. तब से लेकर आज तक बजट डिजिटली पेश किया जा रहा है. इस परंपरा को प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया के कैंपेन का समर्थन माना गया.
ब्लैक बजट और लीक हुआ बजट
बता दें कि वर्ष 1950 में बजट प्रिंटिंग के दौरान लीक हो गया था. उस बजट को उस समय के वित्त मंत्री जॉन माथाई ने पेश करना था. इस घटनाक्रम के बाद प्रिंटिंग मशीनों को राष्ट्रपति भवन से मिंटो रोड शिफ्ट कर दिया गया और फिर 1980 में इसे नॉर्थ ब्लॉक बेसमेंट में शिफ्ट कर दिया गया. इसके बाद 1973-74 में पेश किए गए बजट को ब्लैक बजट कह गया था, क्योंकि उस समय सरकार का खर्च इनकम से ज्यादा हो गया था.
Facts of Union Budget: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी 2026 दिन रविवार को केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जिसके लिए संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हो जोएगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा, वहीं बजट सत्र 2 चरणों में होगा, जिसमें एक चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा. बजट में सरकार के काम-काज का लेखा-जोखा, पिछले वित्त वर्ष का आय-व्यय, घाटे, खर्चों, टैक्स, भविष्य की योजनाओं और प्रोजेक्टों का ब्यौरा होता है. आज हम आपको भारत के केंद्रीय बजट से जुड़ी रोचक जानकारियां दे रहे हैं, जिनके बारे में आप जानते नहीं होंगे…
कहां से आया बजट शब्द?
बता दें कि बजट फ्रेंच लैंग्वेज के शब्द बजेट से बना है, जिसका मतलब होता है ब्रीफकेस, जिसे ऑफिस से जुड़े जरूरी कागजात रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि आजकल ब्रीफकेस की जगह कई तरह के बैग ट्रेंड में आ गए हैं, लेकिन सरकारी ऑफिसों में फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट रखने के लिए आज भी ब्रीफकेस टाइप बैग इस्तेमाल किए जाते हैं. ऐसे ही एक ब्रीफकेस में बजट से जुड़े दस्तावेज लेकर वित्त मंत्री संसद आते हैं, हालांकि आजकल कागजों की जगह टैब ने ले लिया है, लेकिन वित्त मंत्री के हाथ में टैब भी खास ब्रीफकेस में नजर आता है.
क्या है हलवा सेरेमनी?
केंद्रीय बजट पेश करने से पहले हलवा सेरेमनी का चलन है, जो बजट को फाइनल टच देने से पहले निभाई जाती है. बजट तैयार करने की प्रक्रिया कई दिन चलती है, जिसके लिए एक टीम बनाई जाती है. जब तक बजट तैयार नहीं हो जाता, यह टीम वित्त मंत्रालय में ही रहती है और इस दौरान उनके पास उनके फोन भी नहीं होते हैं. इतने दिन की मेहनत के बाद जब बजट को फाइनल करने का दिन आता है तो उस दिन वित्त मंत्रालय में हलवा बनाकर बांटा जाता है, जिसका एक मतलब बजट की खुशी हो तो दूसरा मतलब बजट पेश करने की तैयारी होता है.
कब पेश हुआ पहला बजट?
बता दें कि भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था, लेकिन इस बजट को किसी भारतीय ने नहीं, बल्कि स्कॉटलैंड के पॉलिटिशियन और इकोनॉमिस्ट जेम्स विल्सन ने पेश किया था. वहीं आजादी के बाद स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था, जो एक अंतरिम बजट था. इस बजट को वित्त मंत्री आर. के. शणमुखम चेट्टी ने पेश किया था, जिसे साढ़े 7 महीने यानी 31 मार्च 1948 तक के लिए पेश किया गया था.
सबसे लंबा और सबसे छोटा बजट?
बता दें कि देश का सबसे छोटा बजट 1977 में पेश हुआ था, जो सिर्फ 800 शब्दों का था. इस बजट को उस समय के वित्त मंत्री हिरुभाई मुलजीभाई पटेल ने पेश किया था. समय के हिसाब से अब तक का सबसे लंबा बजट 1 फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया था, जो रिकॉर्ड है, क्योंकि उन्होंने 2 घंटे 42 मिनट तक बजट पेश किया था. वहीं शब्दों के हिसाब से सबसे लंबा बजट 1991 में 18650 शब्दों का पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेश किया था, वहीं उनके बाद अरुण जेटली में 18604 शब्द थे और 2018 में इसे पेश करने में एक घंटा 49 मिनट लगे.
सबसे ज्यादा बार बजट पेश किए
बता दें कि आजादी के बाद आज तक सबसे ज्यादा 10 बार बजट मोरराजी देसाई ने 1962 से 1969 के बीच पेश किया. उनके बाद पी. चिदम्बरम ने 9 बार, प्रणब मुखर्जी ने 8 बार, यशवंत सिन्हा ने 8 बार और डॉ. मनमोहन सिंह ने 6 बार बजट पेश किया. वहीं वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 8 बार बजट पेश करके प्रणब मुखर्जी, यशवंत सिन्हा और मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ दिया है और अब एक फरवरी 2026 को 9वीं बार बजट पेश करके चिदंबरम के बराबर आ जाएंगी.
बजट पेश करने वाली पहली महिला
बता दें कि देश का बजट पेश करने वाली पहली महिला पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1970 में केंद्रीय बजट पेश किया था और उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए भी वित्त मंत्री की भूमिका अस्थायी रूप से निभाई थी. इंदिरा गांधी के अलावा 1958 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने और 1987 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए भी वित्त मंत्री की भूमिका निभाते हुए केंद्रीय बजट पेश किया था.
1999 में बदला बजट का टाइम
बता दें कि 1999 तक केंद्रीय बजट फरवरी महीने के आखिरी दिन शाम 5 बजे पेश किए जाने की परंपरा था, लेकिन 1999 में उस समय के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट पेश करने का समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया था. साल 2017 में एक और परंपरा बदली और बजट फरवरी के आखिरी तारीख की बजाय पहली तारीख को पेश किया जाने लगा.
तब से अब तक बजट एक फरवरी को पेश किया जा रहा है. इस बीच साल 2017 में ही रेल बजट और आम बजट को मर्ज कर दिया गया, जबकि इससे पहले रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किया जाता था. 92 साल तक दोनों बजट को अलग-अलग पेश करने की परंपरा चली, जो साल 2017 में टूट गई.
बजट की भाषा और फॉर्मेट
बता दें कि 1955 तक भारतीय बजट अंग्रेजी भाषा में ही छपता था और पेश किया जाता था, लेकिन कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहे सीडी देशमुख ने बजट को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भाषा में भी छापने की परंपरा शुरू कराई. साल 2021 में कोरोना काल के कारण पेपरलेस बजट पेश किया था और सभी को बजट की डिजिटल कॉपी दी गई थी. तब से लेकर आज तक बजट डिजिटली पेश किया जा रहा है. इस परंपरा को प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया के कैंपेन का समर्थन माना गया.
ब्लैक बजट और लीक हुआ बजट
बता दें कि वर्ष 1950 में बजट प्रिंटिंग के दौरान लीक हो गया था. उस बजट को उस समय के वित्त मंत्री जॉन माथाई ने पेश करना था. इस घटनाक्रम के बाद प्रिंटिंग मशीनों को राष्ट्रपति भवन से मिंटो रोड शिफ्ट कर दिया गया और फिर 1980 में इसे नॉर्थ ब्लॉक बेसमेंट में शिफ्ट कर दिया गया. इसके बाद 1973-74 में पेश किए गए बजट को ब्लैक बजट कह गया था, क्योंकि उस समय सरकार का खर्च इनकम से ज्यादा हो गया था.