Solicitor General of India Duties: केंद्र सरकार ने देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पर एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है. तुषार मेहता को तीसरी बार सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) देते हुए फिर से देश का सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया है. साल 2018 से लगातार इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे तुषार मेहता की यह नई नियुक्ति अगले तीन साल के लिए की गई है. भारत की न्याय व्यवस्था में इस पद को बेहद महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण माना जाता है. आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि सॉलिसिटर जनरल कौन होते हैं और देश के लिए इनका पद क्यों जरूरी है.
कौन होते हैं सॉलिसिटर जनरल?
सॉलिसिटर जनरल, भारत सरकार के दूसरे सबसे बड़े कानूनी अधिकारी होते हैं. देश के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी यानी महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) की मदद के लिए सॉलिसिटर जनरल और कई एडिशनल (अतिरिक्त) सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए जाते हैं. वर्तमान में आर वेंकटरमणी देश के अटॉर्नी जनरल हैं, और तुषार मेहता उनके मुख्य सहायक के रूप में सरकार के कानूनी सलाहकार का काम संभालते हैं.
क्या होते हैं इनके मुख्य काम?
- अदालत में सरकार का पक्ष: जब भी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ कोई मामला आता है, तो सरकार का बचाव करने और उसका पक्ष रखने की मुख्य जिम्मेदारी सॉलिसिटर जनरल की होती है.
- कानूनी सलाह देना: जब भी सरकार या राष्ट्रपति को किसी जटिल मुद्दे पर कानूनी राय की जरूरत होती है, तो सॉलिसिटर जनरल कानून की सही व्याख्या कर उन्हें उचित सलाह देते हैं.
- अटॉर्नी जनरल की मदद: देश के अटॉर्नी जनरल के पास काम का बोझ बहुत ज्यादा होता है, इसलिए सॉलिसिटर जनरल उनके साथ मिलकर बड़े और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की तैयारी करते हैं.
कैसे होती है इनकी नियुक्ति और कार्यकाल?
सॉलिसिटर जनरल की नियुक्ति देश के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली 'कैबिनेट की नियुक्ति समिति' (ACC) की सिफारिश पर की जाती है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति का पत्र जारी होता है. इस पद के लिए देश के बेहद अनुभवी और वरिष्ठ वकीलों को चुना जाता है. इनका सामान्य कार्यकाल तीन साल का होता है, जिसे सरकार आगे भी बढ़ा सकती है. आमतौर पर सरकार बदलने पर ये अधिकारी अपना इस्तीफा दे देते हैं ताकि नई सरकार अपनी पसंद का कानूनी सलाहकार चुन सके.
Solicitor General of India Duties: केंद्र सरकार ने देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पर एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है. तुषार मेहता को तीसरी बार सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) देते हुए फिर से देश का सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया है. साल 2018 से लगातार इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे तुषार मेहता की यह नई नियुक्ति अगले तीन साल के लिए की गई है. भारत की न्याय व्यवस्था में इस पद को बेहद महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण माना जाता है. आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि सॉलिसिटर जनरल कौन होते हैं और देश के लिए इनका पद क्यों जरूरी है.
कौन होते हैं सॉलिसिटर जनरल?
सॉलिसिटर जनरल, भारत सरकार के दूसरे सबसे बड़े कानूनी अधिकारी होते हैं. देश के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी यानी महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) की मदद के लिए सॉलिसिटर जनरल और कई एडिशनल (अतिरिक्त) सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए जाते हैं. वर्तमान में आर वेंकटरमणी देश के अटॉर्नी जनरल हैं, और तुषार मेहता उनके मुख्य सहायक के रूप में सरकार के कानूनी सलाहकार का काम संभालते हैं.
क्या होते हैं इनके मुख्य काम?
- अदालत में सरकार का पक्ष: जब भी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ कोई मामला आता है, तो सरकार का बचाव करने और उसका पक्ष रखने की मुख्य जिम्मेदारी सॉलिसिटर जनरल की होती है.
- कानूनी सलाह देना: जब भी सरकार या राष्ट्रपति को किसी जटिल मुद्दे पर कानूनी राय की जरूरत होती है, तो सॉलिसिटर जनरल कानून की सही व्याख्या कर उन्हें उचित सलाह देते हैं.
- अटॉर्नी जनरल की मदद: देश के अटॉर्नी जनरल के पास काम का बोझ बहुत ज्यादा होता है, इसलिए सॉलिसिटर जनरल उनके साथ मिलकर बड़े और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की तैयारी करते हैं.
कैसे होती है इनकी नियुक्ति और कार्यकाल?
सॉलिसिटर जनरल की नियुक्ति देश के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली ‘कैबिनेट की नियुक्ति समिति’ (ACC) की सिफारिश पर की जाती है. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति का पत्र जारी होता है. इस पद के लिए देश के बेहद अनुभवी और वरिष्ठ वकीलों को चुना जाता है. इनका सामान्य कार्यकाल तीन साल का होता है, जिसे सरकार आगे भी बढ़ा सकती है. आमतौर पर सरकार बदलने पर ये अधिकारी अपना इस्तीफा दे देते हैं ताकि नई सरकार अपनी पसंद का कानूनी सलाहकार चुन सके.