'आम नागरिकों को जानने का हक’, कॉलेजियम सिस्टम पर SC जज का बड़ा बयान

Justice Ujjal Bhuyan: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने न्यायधीशों की नियुक्ति और कॉलेजियम सिस्टम को लेकर कई अहम बातें कहीं हैं, उनके मुताबिक आम नागरिकों को ये जानने का हक है कि आखिर जजों का अपॉइंटमेंट कैसे हुआ, इससे ट्रांस्पेरेंसी आएगी.

Ujjal Bhuyan Supreme Court

Justice Ujjal Bhuyan and Supreme Court (Photo-X)

विज्ञापन

Justice Ujjal Bhuyan On Judicial Appointments: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने शनिवार, 1 अगस्त को जजों के अपॉइंटमेंट प्रॉसेस में ज्यादा ट्रांस्पेरेंसी की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि नागरिकों को ये जानने का अधिकार है कि न्यायधीशों की नियुक्ति कैसे होती है और कुछ खास उम्मीदवारों की ही सिफारिश क्यों की जाती है.

जस्टिस भुइयां ने जताई फिक्र

‘विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी’ की ‘JALDI’ इनिशिएटिव की एक रिपोर्ट जारी होने के मौके पर बोलते हुए, जस्टिस भुइयां ने चिंता जताई कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पिछले 3 फैसलों (रिजॉल्यूशन) में सिफारिशों के पीछे की वजहें नहीं बताई गई थीं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये पारदर्शिता के उस सिद्धांत से पीछे हटने जैसा है, जिसके आधार पर पहले नियुक्तियां होती थीं.

Advertisment

‘नागरिकों को जानने का हक’

जस्टिस भुइयां ने कहा कि कॉलेजियम के पुराने फैसलों में आम तौर पर कम से कम संक्षिप्त जानकारी तो दी ही जाती थी, भले ही वो बहुत डिटेल्ड न हों. उनके मुताबिक, ऐसी जानकारी से जनता को जजों की नियुक्ति का आधार समझने में मदद मिलती थी. उन्होंने कहा कि नागरिकों को ये जानने का हक है कि उनके जज कौन हैं, उन्होंने क्या फैसले सुनाए हैं और उनके सिलेक्शन के पीछे क्या कारण हैं; साथ ही, ऐसी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए.

पहले की नियुक्ति को किया याद

पुरानी मिसाल का जिक्र करते हुए, जस्टिस भुइयां ने 2022 में पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित के कार्यकाल में जारी कॉलेजियम के एक फैसले का जिक्र किया और उसे ठोस तर्कों वाला दस्तावेज बताया. उन्होंने 18 जनवरी 2023 के उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के जज के तौर पर सौरभ कृपाल की नियुक्ति की सिफारिश को दोहराया गया था; उन्होंने कहा कि उन्हें इसके पीछे का तर्क सही लगा. हालांकि उन्होंने ये भी बताया कि सिफारिश दोहराए जाने के बावजूद, 3 साल से ज्यादा समय बीतने पर भी इस पर कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई.

‘काबिल जजों को नुकसान मुमकिन’

जस्टिस भुइयां ने चेतावनी दी कि नियुक्ति के कारणों को दर्ज न करने से काबिल जजों का नुकसान हो सकता है और साथ ही अयोग्य उम्मीदवारों के न्यायपालिका में आने की गुंजाइश बन सकती है. उन्होंने कहा कि पारदर्शिता से संस्थान और जनहित, दोनों का भला होता है.

विज्ञापन

अपने बयान पर दी सफाई

अपनी बात को क्लियर करते हुए, जस्टिस भुइयां ने कहा कि ‘असंवैधानिक टिप्पणियों’ का उनका जिक्र इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पूर्व जज द्वारा 2024 के एक कार्यक्रम में दिए गए बयानों से जुड़ा था. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके कमेंट्स न्यायपालिका के किसी मौजूदा सदस्य के खिलाफ नहीं थे, बल्कि उन्होंने जजों की नियुक्ति में संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की अहमियत पर जोर डाला.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ