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‘राजनीति में ‘फुलस्टॉप’ नहीं, अनुभव की निरंतरता ही लोकतंत्र की ताकत’, राज्य सभा में सांसदों की विदाई पर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। अपने भावुक, परिपक्व और स्पष्ट राजनीतिक संदेश में उन्होंने यह रेखांकित किया कि सक्रिय राजनीति में भले ही भूमिका बदलती हो, लेकिन जनसेवा का संकल्प और सार्वजनिक जीवन की प्रतिबद्धता कभी समाप्त नहीं होती।

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संसद के राज्य सभा में आज करीब 37 सांसद रिटायर हो रहे हैं। इस मौके पर पीएम मोदी ने सदन में संबोधिन दिया। राज्यसभा से रिटायर हो रहे सांसदों की विदाई महज औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह संसदीय परंपराओं, राजनीतिक संस्कारों और लोकतांत्रिक निरंतरता का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। अपने भावुक, परिपक्व और स्पष्ट राजनीतिक संदेश में उन्होंने यह रेखांकित किया कि सक्रिय राजनीति में भले ही भूमिका बदलती हो, लेकिन जनसेवा का संकल्प और सार्वजनिक जीवन की प्रतिबद्धता कभी समाप्त नहीं होती।

प्रधानमंत्री ने सदन के दिग्गज नेताओं एचडी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे और शरद पवार का उल्लेख करते हुए उन्हें भारतीय संसदीय लोकतंत्र की “संस्थागत स्मृति” बताया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं का दशकों का अनुभव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संसदीय परंपराओं की अमूल्य धरोहर है, जिससे नई पीढ़ी के सांसदों को राजनीतिक अनुशासन और प्रतिबद्धता सीखनी चाहिए।

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‘ओपन यूनिवर्सिटी’ के रूप में संसद

पीएम मोदी ने राज्यसभा को केवल विधायी प्रक्रिया का मंच नहीं, बल्कि एक “ओपन यूनिवर्सिटी” करार दिया—जहां विचारधाराओं का आदान-प्रदान, राजनीतिक परिपक्वता और नीतिगत समझ विकसित होती है। उन्होंने कहा कि हर कार्यकाल के साथ यह संस्थान अनुभव और ऊर्जा का संतुलन बनाते हुए लोकतंत्र को और मजबूत करता है।

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संसदीय विरासत के साक्षी

प्रधानमंत्री ने उन सांसदों को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया जिन्हें पुराने और नए, दोनों संसद भवनों में कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संक्रमण और संस्थागत विकास का ऐतिहासिक अनुभव बताया, जो उनके सार्वजनिक जीवन की स्थायी पूंजी रहेगा।

उपसभापति की कार्यशैली की सराहना

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की कार्यशैली को “सहमति और संतुलन की राजनीति” का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी मृदुभाषी शैली और निष्पक्ष संचालन ने सदन में संवाद की स्वस्थ परंपरा को मजबूत किया।

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भविष्य की राजनीति पर संकेत

विदाई ले रहे सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक व्यापक राजनीतिक संदेश दिया— “संसद से विदाई अंत नहीं, बल्कि जनसेवा के नए अध्याय की शुरुआत है। लोकतंत्र में अनुभव कभी अप्रासंगिक नहीं होता।” अंत में, उन्होंने विश्वास जताया कि विदा हो रहे सांसद अपने अनुभव, वैचारिक पूंजी और जनसंपर्क के जरिए सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे। और यही भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।

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First published on: Mar 18, 2026 12:17 PM

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