बांग्लादेश की प्रसिद्ध और निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 19 साल (18 साल, 8 महीने और 10 दिन) के लंबे अंतराल के बाद शुक्रवार को वापस कोलकाता पहुँच गईं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद उन्होंने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया और कहा, "यहां वापस आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है." उन्होंने इस यात्रा को भावनात्मक रूप से 'घर वापसी' जैसा अनुभव बताया. तस्लीमा नसरीन शनिवार (1 अगस्त) की शाम रवींद्र सदन में 'सेक्युलर मिशन ट्रस्ट' द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी.

यह आयोजन कट्टरपंथ और धार्मिक अतिवाद के विरोध तथा अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थन में रखा गया है. इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और वरिष्ठ साहित्यकार शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के भी शामिल होने की संभावना है.

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2007 में छोड़ना पड़ा था शहर

तस्लीमा नसरीन को नवंबर 2007 में भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था. उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक 'द्विखंडितो' में लिखी बातों का कुछ समूहों ने तीखा विरोध किया था और इस पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया था. तत्कालीन वाममोर्चा सरकार के समय स्थिति बिगड़ने पर सेना तक तैनात करनी पड़ी थी, जिसके बाद तस्लीमा को कोलकाता से जयपुर और फिर दिल्ली भेज दिया गया था. 2004 में कोलकाता को अपना दूसरा घर बनाने वाली तस्लीमा तब से दिल्ली में लॉन्ग-टर्म रेसिडेंस परमिट पर रह रही हैं.

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'कोलकाता को कभी अपनी मर्जी से नहीं छोड़ा'

कोलकाता रवाना होने से पहले तस्लीमा नसरीन ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी अपनी इच्छा से कोलकाता नहीं छोड़ा था, बल्कि तत्कालीन सरकार ने उन्हें जाने पर मजबूर किया था. उन्होंने कहा, "1994 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद कोलकाता ही मेरे दिल के सबसे करीब रहा है. मुझे खुशी है कि इतने सालों बाद मैं अपने पाठकों और दोस्तों के शहर में फिर से लौट पाई हूं"

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