Operation Mahadev Jammu and Kashmir: भारतीय सेना ने सोमवार को पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड लश्कर के कमांडर हाशिम मूसा को ढेर कर दिया। ऑपरेशन महादेव के तहत 3 आतंकी ढेर किए गए। जिसमें हाशिम शामिल था। जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से उस पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। हाशिम के मारे जाने के बाद पहलगाम में पर्यटकों की जान बचाने के लिए आतंकियों से लड़ने वाले बहादुर टट्टू चालक आदिल हुसैन के परिवार ने खुशी व्यक्त की है। आदिल के छोटे भाई ने एक वीडियो मैसेज के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
हमारी सेना का शुक्रिया, 26 लोगों को न्याय मिला
आदिल हुसैन के छोटे भाई नौशाद ने कहा- मैं हमारी सरकार और सेना का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने आज बहुत बड़े काम को अंजाम दिया। जिन्होंने तीन आतंकियों को मार गिराया। उन आतंकियों ने वैली में निहत्थे मासूमों का कत्ल किया। मैं हमारी सरकार का शुक्रिया अदा करता हूं। हमारी सेना का शुक्रिया। आदिल ने आगे कहा- इससे लगता है कि 26 लोगों को न्याय मिला। हमारी सेना और सरकार का फिर से एक बार शुक्रिया अदा करता हूं।
पहलगाम में लोगों को बचाते वक्त जान गंवाने वाले आदिल हुसैन के भाई नौसाद ने क्या कहा? pic.twitter.com/Cie3Kzy1Bk
— Avinash Tiwari (@TaviJournalist) July 28, 2025
कैसे चला ऑपरेशन महादेव?
जम्मू कश्मीर पुलिस के अलावा ऑपरेशन महादेव में चिनार कॉर्प्स और सीआरपीएफ शामिल रहीं। संयुक्त ऑपरेशन दो दिनों तक घाटी के घने जंगलों में चला। बताया जा रहा है कि आतंकी जंगल में छुपे हुए बैठे थे। सुरक्षा एजेंसियों को कुछ दिन पहले इन आतंकियों के बारे में खुफिया जानकारी हासिल हुई थी। बताया गया कि दाचीगाम के जंगलों में आतंकियों ने डेरा डाला हुआ है। इसके बाद सेना की स्पेशल यूनिट्स को लिडवास और मुलनार में भेज दिया गया। सुबह करीब 11.30 बजे आतंकियों से सेना के जवानों का आमना-सामना हुआ। चारों ओर से घिरे आतंकियों से जवानों की लगभग 1 घंटे तक मुठभेड़ चलती रही। इसके बाद तीनों आतंकियों को ढेर करने में सफलता मिल गई।
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22 अप्रैल को हुआ था पहलगाम अटैक
बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल को जघन्य घटना को अंजाम दिया गया था। आतंकियों ने लोगों का धर्म पूछकर गोली मारी। इस दौरान कई लोगों से कलमा भी पढ़वाया गया। जो लोग ऐसा नहीं कर पाए, उन्हें तुरंत गोली मार दी गई। भारतीय सेना ने इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं के अड्डों को तबाह कर दिया। संयोग की बात यह है कि ऑपरेशन महादेव ऐसे समय में सफलतापूर्वक पूरा हुआ, जब संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा चल रही है।
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