CM पद छोड़ने के बाद भी 'पावर' में रहना चाहते हैं सिद्धारमैया, हाईकमान ने ठुकराया प्लान

Karnataka Politics: कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी सिद्धारमैया अपनी राजनीतिक पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहते. उन्होंने सरकार और संगठन के बीच तालमेल के लिए एक ‘कोऑर्डिनेशन कमेटी’ बनाने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि, कांग्रेस आलाकमान ने उनके इस खास प्लान को साफ तौर पर ठुकरा दिया है.

Siddaramaiah pension main
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Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में इस हफ्ते एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. सिद्धारमैया ने आखिरकार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. शिवकुमार पहले से ही कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और अब सरकार की कमान मिलने से वे राज्य की राजनीति और पार्टी संगठन दोनों में बेहद मजबूत स्थिति में आ जाएंगे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी आसानी से बैकफुट पर जाने के मूड में नहीं दिख रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी राज्य की राजनीति में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए सिद्धारमैया ने एक नई चाल चली थी. उन्होंने कांग्रेस आलाकमान के सामने एक ‘कोऑर्डिनेशन कमेटी’ बनाने का प्रस्ताव रखा था. सिद्धारमैया की योजना थी कि इस कमेटी का अध्यक्ष बनकर वे सरकार से बाहर रहकर भी हर बड़े फैसले में अपनी दखलअंदाजी बनाए रख सकें. हालांकि, उनके इस प्लान को बड़ा झटका लगा है क्योंकि कांग्रेस हाईकमान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.

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2018 का पुराना मॉडल दोहराना चाहते थे सिद्धारमैया

सिद्धारमैया का यह आइडिया नया नहीं है. साल 2018 में जब कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस की गठबंधन सरकार बनी थी और एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री थे, तब भी एक समन्वय समिति बनाई गई थी. सिद्धारमैया उस कमेटी के अध्यक्ष थे और सरकार के बाहर रहते हुए भी वे सुपर सीएम की तरह काम कर रहे थे. अब वे फिर से उसी तरह की व्यवस्था चाहते थे ताकि सरकार और संगठन दोनों पर उनकी पकड़ कमजोर न हो और उनके समर्थक विधायक भी उनके साथ मजबूती से जुड़े रहें.

हाईकमान ने क्यों ठुकराई मांग?

राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान इस समय सूबे में किसी भी तरह का नया पावर सेंटर नहीं बनाना चाहता. हाईकमान का मानना है कि 2018 में दो अलग-अलग दलों की गठबंधन सरकार थी, इसलिए तालमेल बिठाने के लिए ऐसी कमेटी जरूरी थी. लेकिन इस समय कर्नाटक में कांग्रेस के पास स्पष्ट और पूर्ण बहुमत है, इसलिए ऐसी किसी बाहरी समिति की कोई जरूरत नहीं है. कुल मिलाकर, कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन तो हो गया है, लेकिन डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के गुटों के बीच पर्दे के पीछे की यह शह और मात का खेल आने वाले दिनों में और दिलचस्प हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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