Sanjeev Trivedi
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एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े विवादित चैप्टर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है. चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मामले में न केवल नाराजगी जताई है, बल्कि इस अध्याय को तैयार करने वाले तीन मुख्य लोगों को तत्काल प्रभाव से सभी सरकारी प्रोजेक्ट्स और सार्वजनिक धन से जुड़ी जिम्मेदारियों से अलग करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से जिन तीन लोगों को स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने की किसी भी प्रक्रिया से बाहर रखने का निर्देश दिया है, उनमें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन लोगों ने संबंधित विवादित चैप्टर को लिखा है, उन्हें भविष्य में पाठ्यक्रम तैयार करने के किसी भी कार्य से तुरंत अलग किया जाए. अदालत ने साफ किया है कि इन व्यक्तियों को ऐसी कोई भी जिम्मेदारी न दी जाए जिसमें सार्वजनिक धन का उपयोग शामिल हो.
अदालत ने आदेश दिया है कि यदि Chapter IV को दोबारा लिखा गया है, तो उसे तब तक प्रकाशित न किया जाए जब तक कि विशेषज्ञ समिति की मंजूरी न मिल जाए. इसके साथ ही, न्यायपालिका से जुड़े पाठ्यक्रम के लिए सरकार को एक सप्ताह के भीतर एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें एक वरिष्ठ रिटायर्ड जज, एक प्रमुख विद्वान और एक प्रसिद्ध वकील शामिल हों. कोर्ट ने एनसीईआरटी को यह भी सुझाव दिया है कि वे समिति में किसी प्रमुख न्यायविद् को शामिल करने पर विचार करें.
शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी भोपाल को उच्च कक्षाओं के कानूनी पाठ्यक्रम तय करने की प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए. इसके अलावा, नेशनल सिलेबस एंड टीचिंग लर्निंग मटेरियल कमेटी (NSTC) के उन सदस्यों की भूमिका पर भी पुनर्विचार करने को कहा गया है, जिन्होंने न्यायपालिका पर विवादित चैप्टर छपने से पहले उसे देखा या मंजूरी दी थी.
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला न्यायपालिका की रचनात्मक आलोचना पर कोई रोक नहीं लगाता है. हालांकि, इस मामले में संवेदनहीन टिप्पणी करने वाले मीडिया संस्थानों को कोर्ट बख्शने के मूड में नहीं है. सरकार को निर्देश दिया गया है कि वे मीडिया के उस वर्ग की पहचान करें जिन्होंने इस मामले में अपमानजनक टिप्पणियां की हैं. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि ऐसे लोग देश-विदेश में कहीं भी छिपे हों, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
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