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मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, राज्यसभा नामांकन खारिज करने के फैसले में दखल देने से इनकार

Supreme Court dismissed Meenakshi Natarajan Plea: कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से साफ इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि तेलंगाना मामले की पूरी जानकारी होने के बावजूद नटराजन ने चुनावी हलफनामे में इसे साझा नहीं किया. मध्य प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा ने पैरवी की थी. पढ़ें, संजीव त्रिवेदी की पूरी रिपोर्ट

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Supreme Court dismissed Meenakshi Natarajan Plea: राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी और उसकी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (पर्चा) खारिज करने के फैसले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को तेलंगाना मामले की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने पर्चा भरते समय हलफनामे (Affidavit) में इसे साझा नहीं किया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस बात पर जानकारी छिपाई नहीं जा सकती कि मामले में अभी चार्ज (आरोप) फ्रेम नहीं हुए हैं.

अदालत में कांग्रेस की दलीलें

सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा पेश हुए. सिंघवी ने दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33A के तहत चुनावी पर्चे में जानकारी देना तभी जरूरी होता है जब मामले में चार्ज फ्रेम हो चुके हों. उन्होंने कहा कि नटराजन 2025 में तेलंगाना की प्रभारी बनी थीं, जबकि यह मामला 2022 का है, जिस पर कोर्ट ने सिर्फ नोटिस जारी किया था और कोई संज्ञान नहीं लिया था. सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले को अजीब बताते हुए उन्हें बर्खास्त करने की मांग की और कहा कि नटराजन सिर्फ चुनाव लड़ने का अपना अधिकार मांग रही हैं.

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मध्य प्रदेश सरकार और चुनाव आयोग का पक्ष

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने इन दलीलों का विरोध किया. उन्होंने 6 जजों की बेंच के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा उम्मीदवारी खारिज किए जाने पर अदालती दखल नहीं हो सकती. चुनाव लड़ना एक वैधानिक अधिकार है, मौलिक अधिकार नहीं, इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मांगी जा सकती.

चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से अधिवक्ता दमा शेषाद्रि नायडू ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता का यह आरोप गलत है कि नतीजे समय से पहले घोषित किए गए. उन्होंने जनप्रतिनिधित्व कानून (RP Act) की धारा 53(3) का हवाला देते हुए कहा कि जब उम्मीदवारों की संख्या सीटों से कम होती है, तो आयोग के पास तुरंत परिणाम घोषित करने का अधिकार होता है. मध्य प्रदेश में नतीजे कल ही घोषित किए जा चुके हैं.

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अब क्या है कानूनी रास्ता?

चुनाव आयोग के वकील ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 100(1C) के तहत उम्मीदवारी खारिज किए जाने के मामले को चुनाव के बाद हाई कोर्ट में ‘चुनाव याचिका’ दायर कर ही चुनौती दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी रुख को दोहराते हुए कहा कि एक बार पर्चा खारिज होने के बाद इसका निदान चुनाव आयोग और तय कानूनी प्रक्रिया से ही निकलेगा, जिसके बाद नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया गया.

First published on: Jun 12, 2026 01:41 PM

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About the Author

Vijay Jain

सीनियर न्यूज एडिटर विजय जैन को पत्रकारिता में 23 साल से अधिक का अनुभव है.  न्यूज 24 से पहले विजय दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अलग-अलग जगहों पर रिपोर्टिंग और टीम लीड कर चुके हैं, हर बीट की गहरी समझ है। खासकर शहर राज्यों की खबरें, देश विदेश, यूटिलिटी और राजनीति के साथ करेंट अफेयर्स और मनोरंजन बीट पर मजबूत पकड़ है. नोएडा के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, गोरखपुर, जयपुर, चंडीगढ़, पंचकूला, पटियाला और जालंधर में काम कर चुके हैं इसलिए वहां के कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत आदि की समझ रखते हैं. प्रिंट के कार्यकाल के दौरान इन्हें कई मीडिया अवार्ड और डिजिटल मीडिया में दो नेशनल अवार्ड भी मिले हैं. शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Vijay.kumar@bagconvergence.in

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