केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे केवल छात्र आंदोलन का दबाव ही नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार के भीतर लगातार बदलते हालात को लेकर बढ़ती चिंता भी एक बड़ी वजह बनी. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहा आंदोलन लगातार बढ़ रहा था और उसके राजनीतिक असर को लेकर भी खुफिया एजेंसियों, गृह मंत्रालय तथा संगठन स्तर से मिली रिपोर्टों ने सरकार को स्थिति का बारीकी से आकलन करने के लिए मजबूर किया. इन इनपुट्स के सामने आने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
देश के कई हिस्सों में जारी था छात्र आंदोलन
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक सरकार का रुख सख्त था. उच्च शिक्षा विभाग में बदलाव किए गए, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई और माना जा रहा था कि इन कदमों से विरोध प्रदर्शन शांत हो जाएगा. हालांकि दिन बीतने के साथ जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में छात्र आंदोलन और तेज हो गया. सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट में संकेत दिए गए कि यदि समय रहते कोई बड़ा राजनीतिक फैसला नहीं लिया गया तो स्थिति और जटिल हो सकती है.
IB ने अपनी रिपोर्ट में दी थी ये जानकारी
वहीं, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट में संकेत दिए गए कि यदि अगले 48 घंटे के अंदर कोई ठोस राजनीतिक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन सरकार के हाथों से बाहर जा सकता है.
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह की ओर से भी प्रधानमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगर छात्रों का ये आंदोलन और ज्यादा लंबा खिंचता है तो ये एक बार फिर से विपक्ष को एकजुट होने का मौका दे सकता है. वहीं, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संगठनात्मक फीडबैक में भी आंदोलन के कई राज्यों में और व्यापक होने की आशंका जताई गई थी. इन रिपोर्टों के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और हालात पर लगातार नजर रखी.
सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार देर रात से शनिवार सुबह तक लगातार उच्चस्तरीय बैठकें की गईं. आंदोलन के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का आकलन किया गया. इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे घटनाक्रम की सीधे निगरानी शुरू की. सरकार के भीतर इस बात पर भी चर्चा हुई कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से युवाओं का भरोसा फिर से हासिल करना मुश्किल होगा. ऐसे में राजनीतिक स्तर पर स्पष्ट संदेश देने की जरूरत महसूस की गई.
सरकार ने रिपोर्ट के बाद उठाए ये कदम
इस बीच, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने स्तर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा. बताया जा रहा है कि उन्होंने शिक्षा मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों और परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रयासों की जानकारी दी. हालांकि, सरकार के सामने उस समय सबसे बड़ी चुनौती छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष को शांत करना और राजनीतिक नुकसान को सीमित करना था.
जवाबदेही तय करनी होगी
सूत्रों का कहना है कि उच्च स्तर पर कई दौर की बैठकों के बाद यह नतीजा सामने आया कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से स्थिति सामान्य नहीं होगी. ऐसे में जवाबदेही का साफ संदेश देने के लिए राजनीतिक स्तर पर बड़ा फैसला भी जरूरी हो गया.
ऐसे में शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा और कहा कि वह नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए यह फैसला ले रहे हैं. इसके बाद उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्रोफाइल से मंत्री पद का जिक्र भी हटा दिया. सरकार ने उनके स्थान पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे केवल छात्र आंदोलन का दबाव ही नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार के भीतर लगातार बदलते हालात को लेकर बढ़ती चिंता भी एक बड़ी वजह बनी. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहा आंदोलन लगातार बढ़ रहा था और उसके राजनीतिक असर को लेकर भी खुफिया एजेंसियों, गृह मंत्रालय तथा संगठन स्तर से मिली रिपोर्टों ने सरकार को स्थिति का बारीकी से आकलन करने के लिए मजबूर किया. इन इनपुट्स के सामने आने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
देश के कई हिस्सों में जारी था छात्र आंदोलन
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह तक सरकार का रुख सख्त था. उच्च शिक्षा विभाग में बदलाव किए गए, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई और माना जा रहा था कि इन कदमों से विरोध प्रदर्शन शांत हो जाएगा. हालांकि दिन बीतने के साथ जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में छात्र आंदोलन और तेज हो गया. सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट में संकेत दिए गए कि यदि समय रहते कोई बड़ा राजनीतिक फैसला नहीं लिया गया तो स्थिति और जटिल हो सकती है.
IB ने अपनी रिपोर्ट में दी थी ये जानकारी
वहीं, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट में संकेत दिए गए कि यदि अगले 48 घंटे के अंदर कोई ठोस राजनीतिक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन सरकार के हाथों से बाहर जा सकता है.
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह की ओर से भी प्रधानमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि अगर छात्रों का ये आंदोलन और ज्यादा लंबा खिंचता है तो ये एक बार फिर से विपक्ष को एकजुट होने का मौका दे सकता है. वहीं, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संगठनात्मक फीडबैक में भी आंदोलन के कई राज्यों में और व्यापक होने की आशंका जताई गई थी. इन रिपोर्टों के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और हालात पर लगातार नजर रखी.
सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार देर रात से शनिवार सुबह तक लगातार उच्चस्तरीय बैठकें की गईं. आंदोलन के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का आकलन किया गया. इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे घटनाक्रम की सीधे निगरानी शुरू की. सरकार के भीतर इस बात पर भी चर्चा हुई कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से युवाओं का भरोसा फिर से हासिल करना मुश्किल होगा. ऐसे में राजनीतिक स्तर पर स्पष्ट संदेश देने की जरूरत महसूस की गई.
सरकार ने रिपोर्ट के बाद उठाए ये कदम
इस बीच, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने स्तर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा. बताया जा रहा है कि उन्होंने शिक्षा मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों और परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रयासों की जानकारी दी. हालांकि, सरकार के सामने उस समय सबसे बड़ी चुनौती छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष को शांत करना और राजनीतिक नुकसान को सीमित करना था.
जवाबदेही तय करनी होगी
सूत्रों का कहना है कि उच्च स्तर पर कई दौर की बैठकों के बाद यह नतीजा सामने आया कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से स्थिति सामान्य नहीं होगी. ऐसे में जवाबदेही का साफ संदेश देने के लिए राजनीतिक स्तर पर बड़ा फैसला भी जरूरी हो गया.
ऐसे में शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा और कहा कि वह नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए यह फैसला ले रहे हैं. इसके बाद उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्रोफाइल से मंत्री पद का जिक्र भी हटा दिया. सरकार ने उनके स्थान पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है.