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सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शनकारियों को दी बड़ी राहत, दिल्ली और राज्य सरकारों को FIR वापस लेने का निर्देश

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने दिल्ली पुलिस द्वारा पैलेट गन के संभावित इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस के पास ऐसा कोई स्थायी आदेश या आधिकारिक प्रोटोकॉल मौजूद नहीं है, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई हो.

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शनकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली और राज्य सरकारों को बड़ा निर्देश दिया. देश की टॉप अदालत ने सरकारों को निर्देश दिया कि जिन छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों में कोई गंभीर क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है, उनके खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने या उन्हें बंद करने की दिशा में पर विचार किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों का पहले से गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा.

एफआईआर से किन्हें नहीं मिलेगी राहत?


सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया. अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उनके विरुद्ध फिलहाल किसी तरह की जबरदस्ती या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए. हालांकि, यह सुरक्षा केवल उन्हीं लोगों तक सीमित रहेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड साफ है.

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2700 से अधिक क्रिमिनल बैकग्राउंड के लोग


सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सीजेआई को बताया गया कि 2700 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर और बड़े अपराधों के मामले दर्ज हैं. केंद्र ने स्पष्ट किया कि ऐसे आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली जाएंगी और उनके मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी. सरकार ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का मतलब जांच पर रोक नहीं है. जांच एजेंसियां अपना काम जारी रख सकती हैं, लेकिन बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनावश्यक कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट में उठा पैलेट गन का मुद्दा


सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने दिल्ली पुलिस द्वारा पैलेट गन के संभावित इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस के पास ऐसा कोई स्थायी आदेश या आधिकारिक प्रोटोकॉल मौजूद नहीं है, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई हो. इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत इस विषय पर स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करना चाहेगी ताकि भविष्य में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद हों.

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First published on: Aug 03, 2026 02:45 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक

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