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देश

आसमान में उड़ेगा भारत-रूस की दोस्ती का नया विमान, HAL बनाएगा दो इंजन वाला शक्तिशाली Superjet-100

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड और रूस की कंपनी मिलकर अब भारत में ही सुपरजेट-100 विमान बनाएंगे. इस ऐतिहासिक साझेदारी से देश में नागरिक उड्डयन क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और विदेशी आयात कम होगा.

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Written By: Raja Alam Updated: Jan 29, 2026 17:38

भारत की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है. हैदराबाद में चल रही ‘विंग्स इंडिया’ प्रदर्शनी के दौरान दोनों देशों ने रूस के मशहूर सुपरजेट-100 विमान के भारत में उत्पादन के लिए हाथ मिलाया है. इस ऐतिहासिक साझेदारी का मुख्य मकसद ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को रफ्तार देना और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में विदेशी विमानों पर भारत की निर्भरता को कम करना है. अब भारत अपनी जमीन पर ही आधुनिक कमर्शियल जेट विमानों का निर्माण कर सकेगा.

तीन साल में शुरू होगा उत्पादन

HAL के सीएमडी डीके सुनील ने इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में अपनी सुविधाओं के भीतर एसजे-100 विमानों का उत्पादन शुरू करना है. भारत जैसे विशाल देश में इस श्रेणी के लगभग 200 से अधिक विमानों के लिए एक बड़ा और बेहतर बाजार मौजूद है. कंपनी का इरादा उत्पादन का लंबा इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द विमानों को सेवा में उतारना है. इसके लिए शुरुआती दौर में 10 से 20 विमान रूस से सीधे लीज पर लेने की योजना भी बनाई जा रही है ताकि कनेक्टिविटी तुरंत बढ़ाई जा सके.

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दो इंजन वाले शक्तिशाली जेट की खासियत

सुपरजेट-100 एक बहुत ही कुशल और हाई-टेक वाणिज्यिक विमान है जिसे अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है. इस नैरो-बॉडी जेट विमान में आमतौर पर 87 से 108 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है. यह विमान क्षेत्रीय उड़ानों के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है और वर्तमान में रूस की कई एयरलाइंस और सरकारी ऑपरेटरों द्वारा सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है. भारत में इसके निर्माण से क्षेत्रीय हवाई संपर्क यानी रीजनल कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती मिलेगी और छोटे शहरों के बीच हवाई सफर काफी सस्ता और सुलभ हो जाएगा.

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क्षेत्रीय उड़ानों के लिए वरदान साबित होगी यह साझेदारी

इस समझौते के तहत HAL लाइसेंस के आधार पर विमानों का निर्माण करेगा जिससे तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान भी होगा. रूस की एजेंसी तास (TASS) के मुताबिक यह डील भारत के नागरिक विमानन सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है. अगले एक से डेढ़ साल के भीतर भारत को करीब 10 विमान प्राप्त हो सकते हैं जो उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे. भारत और रूस के बीच हुई यह डील न केवल रक्षा क्षेत्र बल्कि अब नागरिक विमानन के क्षेत्र में भी दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों को दुनिया के सामने पेश करती है.

First published on: Jan 29, 2026 05:38 PM

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