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केजरीवाल को मिली राहत पर ED का वार, दिल्ली HC में दी रिहाई के फैसले को चुनौती

दिल्ली आबकारी नीति मामले में समन का पालन न करने के केस में अरविंद केजरीवाल को मिली राहत अब मुश्किल में पड़ सकती है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है.

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Written By: Varsha Sikri Updated: Mar 30, 2026 23:32
Arvind Kejriwal
Credit: Social Media

दिल्ली के बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मिली राहत के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. ये मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया था कि केजरीवाल ने ED के जारी किए गए समन का पालन नहीं किया. इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को उन्हें बरी कर दिया था. अब ED ने इसी फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. जानकारी के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई जल्द ही जस्टिस जे. स्वर्णा कांत शर्मा की बेंच में हो सकती है.

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा विवाद दिल्ली की 2022 की आबकारी नीति से जुड़ा है. इस नीति को लेकर शुरुआत में दिल्ली के उपराज्यपाल ने शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए थे. इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि नीति में किए गए बदलावों से कुछ लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ मिला. आरोप यह भी था कि लाइसेंस फीस में छूट दी गई और नियमों का पालन नहीं किया गया. इसी जांच के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया और कई लोगों को आरोपी बनाया, जिनमें अरविंद केजरीवाल का नाम भी शामिल था.

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समन का विवाद

ED का कहना था कि जांच के दौरान केजरीवाल को कई बार समन भेजा गया, लेकिन उन्होंने पेश होने में सहयोग नहीं किया. इसी आधार पर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था. हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में उन्हें राहत देते हुए बरी कर दिया था. कोर्ट ने माना कि मौजूद तथ्यों के आधार पर आरोप साबित नहीं होते. अब ED ने हाई कोर्ट में चुनौती देकर इस मामले को फिर से कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है. अगर हाई कोर्ट इस याचिका को मंजूर करता है, तो केजरीवाल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं.

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First published on: Mar 30, 2026 11:32 PM

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