लद्दाख में हिंसक प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार हुए सोनम वांगचुक, जोधपुर किए गए शिफ्ट
हिंसक प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार हुए सोनम वांगचुक
Written By News24 हिंदी

लद्दाख में सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया गया है
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लद्दाख में सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया गया है
लद्दाख में हिंसक प्रदर्शन के बाद अब प्रशासन की तरफ से कार्रवाई शुरू हो गई है. पहले सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक के NGO पर कार्रवाई और फिर अब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. लेह में हिंसक प्रदर्शन के बाद सरकार ने उन पर कार्रवाई की है. सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तार किया गया है. बताया जा रहा है कि लेह में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं.
लद्दाख में हिंसक विरोध प्रदर्शन में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ वांगचुक के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन चल रहा है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए और भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत शामिल किया जाए.
अधिकारियों ने सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की पुष्टि की है. यह गिरफ्तारी गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा जारी एक कड़े बयान के दो दिन बाद हुई है जिसमें वांगचुक पर भीड़ को उकसाने और लद्दाख के नेताओं- केंद्र के बीच चल रही बातचीत को कमजोर करने का आरोप लगाया गया था.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आज देर शाम किसी को बेहद ही सुरक्षा के बीच जोधपुर शिफ्ट किया गया है. कहा जा रहा है कि ये वांचूनग हो सकते हैं. जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर लद्दाख पुलिस ने वांगचुक को हिरासत में लिया. उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई की गई है. पुलिस का कहना है कि हिंसा भड़काने और माहौल खराब करने के आरोपों को देखते हुए यह कदम उठाया गया. सोनम वांगचुक लद्दाख में अलग प्रशासनिक ढांचे और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे थे. उनकी गिरफ्तारी के बाद इलाके में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. अब सोनम वांगचुक जोधपुर की जेल में रहेंगे. NSA के तहत गिरफ्तारी का मतलब है कि बिना ट्रायल लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है.
गिरफ्तारी के डर से वांगचुक आज दोपहर बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए. MHA ने लेह में अपनी लंबी भूख हड़ताल के दौरान भड़काऊ भाषण देने के लिए वांगचुक को स्पष्ट रूप से दोषी ठहराया था. मंत्रालय के अनुसार, इन टिप्पणियों ने भावनाओं को भड़काया और 24 सितंबर को लेह में प्रदर्शनों को हिंसक रूप दिया. इसके बाद भीड़ ने सरकारी कार्यालयों पर हमला किया, वाहनों को आग लगा दी और पुलिस के साथ झड़प की. जवाबी कार्रवाई में, सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिसमें चार नागरिकों की मौत हो गई.
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