Samvidhan Pe Charcha: किरेन रिजिजू बोले- पंडित नेहरू ने मुसलमानों के लिए बात की, दलितों के लिए नहीं

Samvidhan Pe Charcha: लोकसभा सदन में संविधान की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर संविधान पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा चल रही है, जिसका आज दूसरा दिन है। भाजपा और कांग्रेस नेता संविधान पर चर्चा और जवाब पेश कर रहे हैं। आज किरेन रिजिजू ने चर्चा की शुरुआत की।

Minister Kiren Rijiju

Minister Kiren Rijiju

Samvidhan Pe Charcha Lok Sabha Session: संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा सदन में संविधान पर चर्चा चल रही है और आज चर्चा का दूसरा दिन है। पहले दिन शुक्रवार को भाजपा की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संविधान पर चर्चा शुरू की थी। कांग्रेस की वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने इस चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संविधान पर अपनी बात रखी।

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आज दूसरे दिन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संविधान पर चर्चा की शुरुआत की। वहीं आज शाम को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान पर चर्चा का जवाब देंगे। कांग्रेस की ओर से रायबरेली से सांसद राहुल गांधी चर्चा का जवाब देंगे। इससे पहले आइए जानते हैं कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आज संसद में संविधान को लेकर क्या कहा?

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रिजिजू ने समानता को संविधान की आत्मा बताया

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने समानता को संविधान की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि संविधान भारत देश के गौरवशाली अतीत का प्रतिबिंब है। बाबा साहेब अंबेडकर ने देश की जनता को संविधान में अधिकारों के साथ-साथ कुछ दायित्व भी सौंपे। सभी को एक समान रखते हुए समानता का अधिकार दिया, लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बाबा साहेब के दलितों और उनको आरक्षण के विचार पर सवाल उठाए।

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अंबेडकर ने ही एक बार कहा था कि पंडित नेहरू ने 20 साल में 2000 से ज्यादा भाषण दिए, लेकिन उन्होंने हमेशा मुसलमानों की बात की, दलितों और अनुसूचित जातियों के कल्याण की बात कभी नहीं की। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि कांग्रेस देशवासियों को कितना समान मानती है? पंडित नेहरू आरक्षण के पक्ष में नहीं थे।

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अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और सुरक्षा पर बोले किरेन

किरण रिजिजू ने कहा कि एक नैरेटिव बनाया जा रहा है। सेंटर फॉर पॉलिसी एनालिसिस इन यूरोपियन यूनियन के सर्वे के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन में 48 फीसदी लोग भेदभाव के शिकार हैं। ये इस्लाम को मानने वाले मुसलमान हैं। फ्रांस में कई भेदभाव की रिपोर्टें पेश की गईं, जिसमें बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सिर पर स्कार्फ, बुर्का पहनने वालों पर आपत्ति जताई और कहा कि स्पेन में उनके साथ यह भेदभाव किया जा रहा है। मुसलमानों के ख़िलाफ़ आंतरिक घृणा अपराधों की रिपोर्ट ज़्यादा है। आप लोग जानते हैं कि पाकिस्तान की हालत क्या है, बांग्लादेश में क्या होता है।

आप लोग जानते हैं कि अफ़गानिस्तान में सिखों, हिंदुओं, ईसाइयों के साथ क्या हुआ है, चाहे तिब्बत की समस्या हो या म्यांमार हो, श्रीलंका हो या बांग्लादेश, पाकिस्तान हो या अफगानिस्तान, अगर वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होता है या कोई समस्या खड़ी होती है तो सबसे पहला देश जहां वे सुरक्षा मांगने आते हैं, वह भारत है। फिर ऐसा क्यों कहा जाता है कि इस देश में अल्पसंख्यकों के लिए कोई सुरक्षा नहीं है। ऐसी बातें नहीं कही जानी चाहिए, जिससे देश की छवि को नुकसान पहुंचे। मैं यह बात किसी एक पार्टी के लिए नहीं कह रहा हूं, मैं यह देश के लिए कह रहा हूं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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