---विज्ञापन---

4 पैर, हार्ड ट्रेनिंग, आंखों पर स्पेशल ग्लास… क्या है आर्मी की K-9 यूनिट? पहली बार रिपब्लिक डे परेड में आएगी नजर

K-9 Unit in Republic Day Parade: दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार परेड का विशेष आकर्षण भारत के वे मूक योद्धा होंगे, जो सूंघकर दुश्मन का पता लगा लेते हैं, खतरे को भांप लेते हैं, जिन्हें 4 पैर वाले सैनिक भी कहा जाता है. यह यूनिट पहली बार कर्तव्य पथ पर परेड में मार्च करेगी.

---विज्ञापन---

Indian Army K-9 Unit: भारतीय सेना ने जज्बे, शौर्य और दुश्मन का समूल नाश करने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. दुनिया की कई बड़ी सेनाओं में भारतीय सेना का नाम भी बड़े गर्व से लिया जाता है. आज हमारी तीनों सेनाओं के लाखों जवान जल-थल और अंबर में तैनात रहते हैं, तब करीब 140 करोड़ भारतीय अपने घरों में चैन की नींद सो पाते हैं.

यूं तो भारतीय सेना में लंबे-चौड़े, डील-डौल वाले जवानों को भर्ती किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सेना में न बोल सकने वाले जवान भी होते हैं, जो पलक झपकते ही दुश्मन का सुराग ढूंढ लेते हैं और उसका खात्मा करने में बड़ा साथ देते हैं. न केवल भारतीय सेना में, बल्कि सभी भारतीय सशस्त्र बलों ने इन साइलेंट जवानों की पूरी यूनिट होती है.

---विज्ञापन---

परेड का विशेष आकर्षण होगी यूनिट

जी हां, बात हो रही है K-9 यूनिट की, जो इस बार गणतंत्र दिवस परेड में नजर आएगी. पहली बार यह यूनिट परेड में मार्च करेगी और परेड का विशेष आकर्षण भी होगी. K-9 शब्द Canine (कैनाइन) से आया है, जिसका मतलब कुत्ता होता है, जी हां K-9 यूनिट स्पेशल ट्रेनिंग के साथ प्रशिक्षित कुत्ते होते हैं, जो अपने हैंडलर के साथ सेना का सबसे शक्तिशाली हथियार भी हैं.

K-9 यूनिट को 4 पैर वाले सैनिक भी कहा जाता है, जो आर्मी प्रिंट की कोटनुमा यूनिफॉर्म और आंखों पर विशेष ब्लैक ग्लास लगा अपने हैंडलर के साथ मार्च पास्ट करेंगे. अभी यूनिट में जर्मन शेफर्ड और बेल्जियन मैलिनोइस जैसी विदेशी नस्लों के कुत्तों को ही शामिल किया गया है, लेकिन आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारतीय कुत्तों को भी K-9 यूनिट की ट्रेनिंग दी जा रही है.

---विज्ञापन---

कड़ी ट्रेनिंग के बाद बनते हैं जवान

बता दें कि K-9 यूनिट को बेहद खास, बड़े और कठिन मिशनों के लिए तैयार किया जाता है. जवानों की तरह इन्हें भी 10 महीने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद ही यूनिट में शामिल और तैनात किया जाता है. अर्धसैनिक बलों के जवानों के साथ इन्हें पेट्रोलिंग करते समय साथ रखा जाता है, ताकि बम, नशीले पदार्थों, विस्फोटक पदार्थों का सूंघकर पता लगा सकें और उनका सुराग दे सकें.

अगर कोई दुश्मन या आतंकी भाग जाए तो यह कुत्ते सूंघकर उस तक पहुंचने में भी सक्षम हैं. शवों का पता भी ये कुत्ते सूंघकर लगा लेते हैं, इसलिए प्राकृतिक आपदा के समय इनकी मदद जरूरी ली जाती है. विशेष प्रकार के चश्मे लगाकर ये कुत्ते रात के अंधेरे में भी अपना काम कर सकते हैं. ये कुत्ते गोलीबारी में शांत रहते हैं और अपने हैंडलर के इशारों पर ही चलते हैं.

---विज्ञापन---

हैंडलर के इशारों पर काम करते

बता दें कि इन कुत्तों को ध्यान भटकाने वाली चीजों को इग्नोर करने की ट्रेनिंग भी दी जाती है, इसलिए जब वे अपने शिकार के पीछे दौड़ते हैं तो रास्ते में कोई भी चीज उन्हें उनके लक्ष्य से नहीं भटका सकती. इन्हें सिर्फ अपने हैंडलर के इशारों और उनकी आवाज पर प्रतिक्रिया देना सिखाया जाता है. भारतीय सेना, CRPF, CISF, BSF और NSG में K-9 यूनिट को शामिल किया गया है.

सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के पास 1500 डॉग्स की K-9 यूनिट है. बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) टेकानपुर में नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग्स (NTCD) में देसी नस्लों के कुत्तों को ट्रेनिंग देती है और उनकी ब्रीडिंग भी करती है. जैसे हर जवान की कोई न कोई खासियत होती है, उसी तरह कुत्तों को भी उनकी क्षमता और काबिलियत के अनुसार ट्रेंड करके इस्तेमाल में लाया जाता है.

---विज्ञापन---

जवानों के जैसे रिटायर होते हैं ये

जवानों की तरह K-9 यूनिट के मूक योद्धाओं को भी मेडल से सम्म्मानित किया जाता है. जवानों की तरह यह भी एक निश्चित सेवाकाल पूरा करने के बाद रिटायर होते हैं. अकसर सेना के जवानों और अधिकारियों के द्वारा ही इन्हें गोद ले लिया जाता है. इस बार गणतंत्र दिवस पर परेड में शामिल करके पूरी दुनिया को भारत के इन मूक योद्धाओं से रूबरू कराया जाएगा.

First published on: Jan 17, 2026 02:10 PM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola