'वोट चोरी से चुने सांसद बना रहे हैं कानून', PC में राहुल गांधी ने उठाए तीखे सवाल, बोले-तुरंत इस्तीफा दें CEC ज्ञानेश कुमार

चुनाव आयोग पर हुए खुलासों को लेकर राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और आयोग पर तीखे सवाल दागे. पीसी में अमित शाह का पुराना वीडियो दिखाते हुए उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र और यूपी चुनावों के नतीजों पर सवाल उठाए. राहुल ने कहा कि 50 साल की राजनीति देखने के बाद भी समझ नहीं आ रहा कि सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) कैसे गायब हो गई.

rahul gandhi press conference

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी. credit: X ( @RahulGandhi)

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Rahul Gandhi press conference: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निष्पक्षता से काम न करने और चुनावों में धांधली कराने का सीधा आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश में लोगों के वोट को हाईजैक किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ है और यह केवल वोटों की चोरी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर कानून की चोरी है. राहुल गांधी ने कहा कि जब वोट चोरी करके सांसद चुने जाते हैं, तो वही लोग संसद में बैठकर देश के लिए कानून बनाते हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना ही खत्म हो रही है.

‘संविधान पर हमला और देश के साथ विश्वासघात’

राहुल गांधी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार ने देश के संविधान पर हमला किया है और संस्थागत गरिमा को नष्ट करने का काम किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के सभी चुनावों में धांधली की गई है, जो हर एक भारतीय नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का खुला हनन है. उन्होंने कहा कि यह देश के खिलाफ काम करने जैसा है और इस तरह के कदमों से लोकतंत्र व संविधान को कमजोर किया जा रहा है. विपक्ष के नेता ने साफ किया कि चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्था पर अब सवाल खड़े हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

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इससे पहले राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक वीडियो भी मीडिया के सामने दिखाया और भारतीय चुनाव प्रणाली के नतीजों पर हैरानी जताई. राहुल गांधी ने कहा कि वे लंबे समय से भारतीय राजनीति को बहुत करीब से देख रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं करीब 50 सालों से भारतीय राजनीति को देख और समझ रहा हूं, लेकिन आज जो चुनावी परिदृश्य सामने आ रहा है, वह चौंकाने वाला है.” उन्होंने दावा किया कि हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्यों के चुनावी नतीजों पर इसका सीधा असर पड़ा है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने राजनीति के बुनियादी नियमों पर बात करते हुए कहा कि जनता के बीच जब सरकार के खिलाफ असंतोष होता है, तो वह नतीजों में साफ दिखता है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर इन राज्यों में सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) ने काम क्यों नहीं किया? राहुल ने कहा, “यह बात समझ से परे है कि जहां जमीन पर लोगों में गुस्सा था, वहां एंटी-इनकंबेंसी कैसे पूरी तरह बेअसर साबित हो गई?”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका और हाल में सामने आए तथ्यों ने चुनाव प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने साफ किया कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर ही टिका होता है, और जब इस पर सवाल उठते हैं तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है.

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इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर कहा कि संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो चुका है और अब इंसाफ होकर रहेगा. राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में #VoteChori हैशटैग का इस्तेमाल किया.

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इससे पहले बुधवार को भी उन्होंने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि मतदाता सूची में कथित हेरफेर और ‘वोट चोरी’ संविधान पर सीधा हमला है.

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, यह पूरा मामला एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद गरमाया है. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया, फॉर्म 6, वोटरों के नाम हटाने और वोटर लिस्ट डेटाबेस तक पहुंच से जुड़े फैसलों पर करीब 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं. विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर नियमों और निर्णयों को लेकर मतभेद रहे हैं.

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चुनाव आयोग का रुख

विपक्ष के तीखे आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने आंतरिक फूट या मतभेद के दावों को खारिज कर दिया है. चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट स्टेज पर सवाल उठाना, सुझाव देना और इनपुट मांगना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है. आयोग ने साफ किया कि SIR समेत सभी अहम फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और मंजूरी से ही लिए जाते हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है और 29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक भी बुलाई गई है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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