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‘एंटी-बयोटिक फायदेमंद साबित नहीं हो रहीं’, पढ़ें PM मोदी ने ‘मन की बात’ में क्या-क्या कहा?

PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी ने आज साल 2025 की आखिरी मन की बात में जहां देश की उपलब्धियां गिनाईं और नए साल की चुनौतियों पर चर्चा की, वहीं मन की बात करते हुए उन्होंने ICMR की रिपोर्ट पर चिंता भी जताई, जो एंटी-बायोटिक दवाओं को लेकर थी.

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Edited By : Khushbu Goyal Updated: Dec 28, 2025 14:12
PM Modi Mann Ki Baat

PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री मोदी ने आज 28 दिसंबर दिन रविवार को देशवासियों के साथ अपने ‘मन की बात’ की. आज उनके मन की बात कार्यक्रम का साल 2025 का आखिरी एपिसोड प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने 2025 की उपलब्धियों और चुनौतियों के साथ-साथ नए साल 2026 की संभावनाओं, विकास और वोकल फॉर लोकल जैसे मुद्दों पर बात की.

ICMR की रिपोर्ट पर PM ने जताई चिंता

वहीं अपने मन की बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साल 2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए जिन पर हर भारतीय को गर्व महसूस हुआ. देश की सुरक्षा से लेकर खेल के मैदान तक, विज्ञान की प्रयोगशालाओं से लेकर दुनिया के बड़े मंचों तक, भारत ने हर जगह अपनी मजबूत छाप छोड़ी, लेकिन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की रिपोर्ट ने चिंता में डाला दिया.

रिपोर्ट में बताया गया है कि निमोनिया और UTI जैसी कई बीमारियों के खिलाफ एंटी-बायोटिक दवाएं कमजोर साबित हो रही हैं. इसका एक बड़ा कारण लोगों द्वारा बिना सोचे-समझे एंटी-बायोटिक दवाओं का सेवन करना है. एंटी-बायोटिक ऐसी दवाएं नहीं हैं, जिन्हें यूं ही ले लिया जाए. इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए, वरना खतरनाक साबित हो सकती हैं.

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प्रधानमंत्री ने हैकाथॉन 2025 को सराहा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस महीने स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025 का समापन हुआ. इसमें 80 से ज्यादा सरकारी विभागों की 270 से ज्यादा समस्याओं पर स्टूडेंट्स ने काम किया, जिन्होंने ऐसे सॉल्यूशन दिए, जो रियल लाइफ चैलेंज से जुड़े थे. गीतांजलि ने कहा कि यह अब सिर्फ एक क्लास नहीं, कैंपस का सांस्कृतिक केंद्र है. यहां हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत है, लोक परंपराएं हैं, शास्त्रीय विधाएं हैं. छात्र यहां साथ बैठकर रियाज करते हैं. प्रोफेसर साथ बैठते हैं, उनके परिवार भी जुड़ते हैं.

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‘जहां चाह, वहां राह’… इस कहावत को सच कर दिखाया मणिपुर के युवा मोइरांगथेम सेठ जी ने. उनकी उम्र 40 साल से भी कम है. श्रीमान मोइरांगथेम जी मणिपुर के जिस दूर-सुदूर क्षेत्र में रहते थे, जहां बिजली की बड़ी समस्या थी. इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने लोकल सॉल्यूशन पर जोर दिया और उन्हें यह सॉल्यूशन सोलर पावर में मिला. फिजी में भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए वहां की नई पीढ़ी को तमिल भाषा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

First published on: Dec 28, 2025 01:51 PM

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