शनिवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में शिरकत की. कॉलेज तक पहुंचने के लिए पीएम मोदी ने मेट्रो से सफर तय किया. इस दौरान उन्होंने बच्चों और महिलाओं से बातचीत की. प्रधानमंत्री बच्चों के साथ हंसते-खिलखिलाते नजर आए. पीएम मोदी ने SRCC पहुंचकर शताब्दी समारोह में दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस दौरान ऑडिटोरियम में हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स और टीचर्स मौजूद रहे.

SRCC के फाउंडर को दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने कॉलेज के फाउंडर सर श्री राम की मूर्ति पर माला चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. कॉलेज के चेरमैन अजय एस श्रीराम ने पीएम मोदी का शताब्दी समारोह में औपचारिक तौर पर स्वागत किया. SRCC के शताब्दी समारोह के मौके पर 100 रुपये के स्मारक सिक्के को जारी किया गया. इस पर कॉलेज की बिल्डिंग का ड्राफ्ट उकेरा गया है. कार्यक्रम में पीएम मोदी ने छात्रों को संबोधित भी किया. उन्होंने कहा, '' आज का अवसर श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के लिए बहुत ऐतिहासिक है. ये देश के शिक्षा क्षेत्र के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है. SRCC से जुड़ी कई पीढ़ियां यहां एक साथ आई हैं. मैं SRCC के शताब्दी समारोह पर आप सभी को बधाई देता हूं.''

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पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने कहा, ''आज भी, जब दिल्ली यूनिवर्सिटी में कोई पूछता है कि आप किस कॉलेज से हैं, तो बस SRCC कह देना ही काफी होता है.'' उन्होंने कहा कि धुरंधर भले न हों, लेकिन SRCC के लोगों ने हर क्षेत्र में धूम मचाई है. पीएम मोदी ने कहा- ''पिछले कुछ दिनों में इस कार्यक्रम, और खासकर 2013 में दिए गए मेरे भाषण की काफी चर्चा हुई है. लोगों ने इसे याद किया है, दोबारा सुना है और फिर से पढ़ा है. हो सकता है कि नई पीढ़ी के लोगों ने भी इसे फिर से देखा हो. एक तरह से, मैं कह सकता हूं कि उस भाषण ने एक लहर पैदा कर दी थी.''

'आतंकवाद फैलाने वाले बैकफुट पर'

प्रधानमंत्री ने कहा- ''एक ऐसा गिरोह है जो मेरी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करेगा और उसे मेरे खाते में डाल देगा. इसलिए, मैं आपको इसके बारे में पहले ही आगाह कर देता हूं. आज, आतंकवाद फैलाने वाले बैकफुट पर हैं. अगर पाकिस्तान कोई गलत हरकत करता है, तो भारत की सेना उनके इलाके में घुसकर हमला करती है. जम्मू-कश्मीर से लेकर नॉर्थ-ईस्ट तक शांति बढ़ी है. माओवादी आतंकवाद और नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है. जो दुनिया कभी भारत की पॉलिसी से जुड़ी सुस्ती को लेकर परेशान थी, आज वही भारत की पॉलिसी से जुड़ी सक्रियता की बात कर रही है."

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