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जयपुर में आयोजित 78वीं सेना दिवस परेड के बाद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना के बदलते स्वरूप और भविष्य की तैयारियों पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने साफ कहा कि भारतीय सेना अब केवल मौजूदा खतरों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की लड़ाइयों के लिए खुद को लगातार तैयार कर रही है. सेना प्रमुख ने कहा- ‘पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में स्पष्ट बदलाव आया है. हम भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मिशन ओरिएंटेड और फ्यूचर रेडी सैन्य संरचनाएं विकसित कर रहे हैं.’ उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा- ‘आप सेना का मनोबल बढ़ाइए, बाकी सभी चुनौतियों से सेना पूरी सक्षमता से निपट लेगी.’
इस वर्ष की परेड में पहली बार शक्तिमान भैरव बटालियन और दिव्यांश पेट्रोल यूनिट का प्रदर्शन किया गया. सेना प्रमुख ने बताया कि ये इकाइयां भविष्य की युद्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं, जो तेज, सटीक और मिशन आधारित कार्रवाई में सक्षम हैं. यह वही भारतीय सेना है जो बदलती युद्ध शैली के साथ खुद को हर दिन अपग्रेड कर रही है. यह परेड नागरिकों को आश्वस्त करती है कि भारतीय सेना हर समय, किसी भी चुनौती और किसी भी आक्रमण का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. भविष्य की लड़ाई बदलती रहेगी, और भारतीय सेना समय के साथ खुद को और मजबूत बनाती रहेगी.
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जनरल द्विवेदी ने स्वदेशीकरण को लेकर कहा- ‘हमें ऐसी सेना चाहिए, जो भारत में डिजाइन किए गए और भारत में ही बने उपकरणों से लैस हो.’ उन्होंने कहा कि स्वदेशीकरण अब केवल रणनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है. परेड में प्रदर्शित स्वदेशी ड्रोन, जैमर सिस्टम, मोबाइल ड्रोन ऑपरेटर यूनिट और सैटेलाइट कम्युनिकेशन से लैस OB वैन इसी आत्मनिर्भर भारत की सोच का प्रमाण हैं. जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया- ‘टेक्नोलॉजी का उपयोग सैनिक को विस्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि उसे और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है.’ नेटवर्किंग, डेटा-सेंट्रिक ऑपरेशन और रियल-टाइम डिसीजन मेकिंग को उन्होंने भविष्य की लड़ाई की नींव बताया.
आर्मी चीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा- ‘इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया और सटीक निशाने की क्षमता को साबित किया है.’ उन्होंने इसे एक जिम्मेदार और सक्षम बल की तस्वीर बताया, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. राजस्थान को लेकर सेना प्रमुख ने भावुक शब्दों में कहा- ‘हम आर्मी डे परेड को राजस्थान लाना चाहते थे, क्योंकि सेना में सबसे बहादुर सैनिकों में बड़ी संख्या राजस्थान से आती है.’ उन्होंने कहा कि यह धरती इतिहास, परंपरा और बलिदान की प्रतीक रही है, और जयपुर की जनता ने इस परेड को खुले दिल से अपनाया.
सेना प्रमुख ने कहा- ‘जब सैनिक सीमा पर खड़ा होता है, तो उसके कंधों पर पूरे देश का भरोसा होता है.’ उन्होंने सैनिकों के परिवारों की देखभाल को समाज की भी जिम्मेदारी बताया. सेना प्रमुख ने सेवा निवृत्त सैनिकों को लेकर कहा- ‘फौजी कभी रिटायर नहीं होता.’ उन्होंने बताया कि ‘वेटरन आवर्स’ की शुरुआत की गई है, ताकि राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की क्षमताओं का पूरा उपयोग किया जा सके. उन्होंने कहा कि सेवा के दौरान कई बार सैनिक अपनी खूबियों को नहीं पहचान पाते, लेकिन राष्ट्र को उसकी आवश्यकता हमेशा रहती है.
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