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देश

उमर अब्दुल्ला ने तिरंगे जैसे रिबन को काटने से किया इनकार, Video देखकर आप भी करेंगे तारीफ

श्रीनगर के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तिरंगे जैसे रंगों वाले रिबन पर कैंची चलाने से इनकार कर दिया. उनके इस कदम ने देशभक्ति और सम्मान की नई मिसाल पेश की है.

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Written By: Raja Alam Updated: Apr 15, 2026 20:51

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा किया जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. श्रीनगर के ‘कश्मीर हाट’ में स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए ‘नो योर आर्टिसन’ प्रदर्शनी लगाई गई थी जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री को करना था. जब वे उद्घाटन के लिए पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहां बंधा रिबन बिल्कुल भारतीय तिरंगे के केसरिया सफेद और हरे रंग जैसा लग रहा था. अब्दुल्ला ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए वहां रखी कैंची का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया.

रिबन काटने के बजाय हाथ से खोली गांठ

कैंची से रिबन काटने के बजाय मुख्यमंत्री ने बहुत सावधानी से अपने हाथों से रिबन की गांठ खोली और उसे सुरक्षित तरीके से अधिकारियों को सौंप दिया. उन्होंने आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे रंगों को काटा नहीं जाना चाहिए और इसे पूरे सम्मान के साथ सहेज कर रखा जाए. सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उमर अब्दुल्ला अधिकारियों को समझाते दिख रहे हैं कि यह अपमानजनक हो सकता है. उनका यह कदम राष्ट्रीय गौरव के अपमान को रोकने वाले कानूनों के प्रति उनकी समझ और सम्मान को दर्शाता है.

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आयोजकों की सफाई और कार्यक्रम का मकसद

इस घटना के बाद कार्यक्रम के आयोजकों ने स्पष्ट किया कि तिरंगे जैसे रंगों वाले रिबन का चुनाव जानबूझकर नहीं किया गया था बल्कि कश्मीरी बुनाई की चमक दिखाने के लिए किया गया था. हालांकि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ी जिसमें पश्मीना शॉल और नक्काशीदार लकड़ियों जैसे कई बेहतरीन काम प्रदर्शित किए गए थे. इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के स्थानीय शिल्पकारों की कला को नई पहचान दिलाना और उनके रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है. उमर अब्दुल्ला ने इस दौरान कई कारीगरों से मुलाकात भी की और उनके काम की सराहना की.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और पुराना रिकॉर्ड

उमर अब्दुल्ला के इस कदम ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है जहाँ एक बड़ा वर्ग उनके इस फैसले को सच्ची देशभक्ति की मिसाल बता रहा है. समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना एक नागरिक की स्वाभाविक जिम्मेदारी है जिसे मुख्यमंत्री ने बखूबी निभाया. वहीं कुछ आलोचक इसे केवल एक दिखावा मान रहे हैं लेकिन यह पहली बार नहीं है जब अब्दुल्ला ने ऐसा किया हो. साल 2024 में भी विपक्ष के नेता रहते हुए उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में तिरंगे जैसे रिबन पर कैंची चलाने से मना कर दिया था जो उनके इस सिद्धांत को मजबूती देता है.

First published on: Apr 15, 2026 08:51 PM

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