अगर आप भी आने वाले समय में अपने लिए घर खरीदने, नई कार लाने या बच्चों के लिए हायर एजुकेशन लोन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है. भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में एक ऐसा बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है, जो कम सिबिल स्कोर वाले लोगों के लिए लोन की राह को बेहद मुश्किल बना सकता है.
भारतीय रिजर्व बैंक का नया एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क 1 अप्रैल, 2027 से पूरी तरह लागू होने जा रहा है. इस नए नियम के बाद अगर किसी का सिबिल स्कोर 730 से कम है, तो बैंक उसे लोन देने में भारी आनाकानी करेंगे और उसकी प्रोफाइल की बेहद कड़ी जांच की जाएगी. आंकड़ों के मुताबिक, इस बदलाव से देश के करीब 62% लोन आवेदकों पर सीधा असर पड़ेगा.
62% भारतीयों पर संकट
अब बैंक लोन देते वक्त बेहद सेलेक्टिव हो जाएंगे. इसका सीधा नुकसान कमजोर क्रेडिट हिस्ट्री वाले लोगों को होगा. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में लोन के लिए अप्लाई करने वाले लगभग 62 फीसदी लोगों का सिबिल स्कोर 730 से नीचे रहता है.
नए रूल्स का क्या होगा असर
होम, कार या पर्सनल लोन की एप्लीकेशन सीधे खारिज की जा सकती हैं. अगर लोन मंजूर भी हुआ, तो बैंक भारी-भरकम ब्याज दरें वसूली कर सकते हैं. बैंक लोन के बदले एक्स्ट्रा सिक्योरिटी, गारंटी या एसेट की मांग कर सकते हैं.
730+ सिबिल वालों की चमकेगी किस्मत
इस नए नियम के आने के बाद बैंक उन ग्राहकों को हाथों-हाथ लेंगे जिनका सिबिल स्कोर 730 या उससे ऊपर है. इन्हें वित्तीय रूप से अनुशासित माना जाता है. देश के ऐसे करीब 7 करोड़ भारतीयों को आने वाले समय में तेज लोन अप्रूवल, कम ब्याज दरें और बैंकों की तरफ से बेहतरीन ऑफर्स मिलेंगे. अब बैंक सिर्फ आपकी टाइम पर ईएमआई चुकाने की आदत ही नहीं देखेंगे, बल्कि आपकी आय की स्थिरता, मौजूदा कर्ज का स्टे्टस, रोजगार की स्थिति और लोन के बदले रखी जाने वाली संपत्ति के मूल्य का भी गहन मूल्यांकन करेंगे.
इस संकट से बचने के लिए क्या करें?
2027 की डेडलाइन आने में अभी समय है, इसलिए आम लोग अपनी क्रेडिट आदतों में सुधार करके इस संकट से बच सकते हैं. अपनी हर छोटी-बड़ी ईएमआई का भुगतान हमेशा समय पर करें. क्रेडिट कार्ड के बिलों को ड्यू डेट से पहले पूरी तरह सेटल करें, केवल ‘मिनिमम ड्यू’ चुकाने की आदत बदलें.