Om Pratap
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Jal Jeevan Mission: भारत का जल जीवन मिशन 5 साल के कम उम्र के करीब 1.35 लाख बच्चों की जान हर साल बचाएगा। इसका दावा 2019 में नोबेल प्राइज विजेता माइकल क्रेमर ने किया है। उन्होंने भारत के जल जीवन मिशन के बारे में कहा कि उनके अध्ययन से निष्कर्ष निकला है कि अगर भारत में लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध कराया जाए तो लगभग 30 फीसदी शिशुओं की मृत्यु को कम किया जा सकता है।
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शिकागो यूनिवर्सिटी की ओर से प्रकाशित पेपर में कहा गया है कि जल जीवन मिशन के माध्यम से दिया जाने वाला पानी प्रदूषण से मुक्त होना चाहिए।
माइकल क्रेमर एक अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं। 2019 में उन्हें अर्थशास्त्र का नोबेल दिया गया था। दुनिया में गरीबी कम करने के उनके प्रैक्टिकल नजरिए के लिए उन्हें अभिजीत बनर्जी और एस्थर डुफ्लो के साथ नोबेल अवॉर्ड दिया गया था।
क्रेमर ने अपने रिसर्च पेपर में कहा कि नवजात बच्चों की मौत के कारणों में सबसे ज्यादा डायरिया के मामले शामिल होते हैं। ऐसे में जल जीवन मिशन कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
A paper by Nobel Laureate Michael Kramer finds that #JalJeevanMission will save lives of 1.36 lakh under 5 children every year!@jaljeevan_ #NobelPrize pic.twitter.com/mXxMFWadPk
— DD News (@DDNewslive) October 11, 2022
नोबेल विजेता क्रेमर कहा कि भारत के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड और नाइट्रेट की मात्रा होती है जो पीने योग्य नहीं होता है। ऐसा पानी का सेवन करने से छोटे बच्चों को काफी नुकसान हो सकता है। इसकी जानकारी के बाद जागरूकता अभियान भी चलाया गया और यह जरूरत महसूस की गई कि अगर साफ पानी की उपलब्धता होगी तो हम शिशु मृत्यु दर में कमी ला सकेंगे।
जल जीवन मिशन योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को किया था। इस योजना को सफल बनाने के लिए भारत सरकार ने 3 लाख 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से 2024 तक हर घर नल से शुद्ध जल पहुचाने का लक्ष्य रखा है।
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आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में भारत के 50 प्रतिशत से अधिक आबादी के पास शुद्ध और साफ पीने का पानी उपलब्ध नहीं था। इस वजह से डायरिया जैसी दिक्कतें होती थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत में डायरिया तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
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