रेलवे के इन कर्मचारियों की सैलरी में हो सकती है कटौती, रनिंग अलाउंस में बदलाव की तैयारी

भारतीय रेलवे ने लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और अन्य रनिंग स्टाफ को मिलने वाले किलोमीटरेज अलाउंस की गणना में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे कई कर्मचारियों की मासिक आय कम हो सकती है, जबकि रेलवे का तर्क है कि इसका मकसद भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है. फिलहाल प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है.

indian railway
विज्ञापन

भारतीय रेलवे अपने रनिंग स्टाफ के वेतन ढांचे से जुड़े एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी में है. रेलवे बोर्ड ने लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (पूर्व में गार्ड) और अन्य रनिंग स्टाफ को मिलने वाले किलोमीटरेज अलाउंस (Kilometrage Allowance) की गणना के तरीके में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है. यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो कई कर्मचारियों की मासिक आय पर असर पड़ सकता है.

बता दें कि रेलवे अब किलोमीटर की जगह ‘ड्यूटी कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स’ (DCI) लागू करने पर विचार कर रहा है. रेलवे के रनिंग स्टाफ का वेतन केवल मूल वेतन और महंगाई भत्ते तक सीमित नहीं होता है. उनकी आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा किलोमीटरेज अलाउंस से आता है, जो ट्रेन संचालन के दौरान तय की गई दूरी के आधार पर दिया जाता है. प्रस्तावित बदलाव इसी भत्ते की गणना से जुड़ा है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि नए फार्मूले के अनुसार भुगतान किया गया तो वर्तमान व्यवस्था की तुलना में कई कर्मचारियों को कम राशि मिल सकती है.

विज्ञापन

रेलवे क्यों ले रहा ये फैसला?

रेलवे बोर्ड से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में तेज रफ्तार ट्रेनों का संचालन करने वाले लोको पायलट अपेक्षाकृत कम समय में अधिक दूरी तय कर लेते हैं, जिससे वर्तमान किलोमीटरेज अलाउंस के आधार पर प्रति घंटे मिलने वाला भुगतान काफी अधिक हो जाता है. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई लोको पायलट 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चार घंटे में 400 किलोमीटर की दूरी तय करता है, तो मौजूदा नियमों के तहत उसे मिलने वाला भुगतान असंतुलित माना जा रहा है.

रेलवे का कहना है कि प्रस्तावित नई प्रणाली कर्मचारियों के कार्यभार और परिचालन परिस्थितियों का अधिक संतुलित आकलन करेगी. हालांकि, कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यदि यह प्रस्ताव लागू हुआ तो रनिंग स्टाफ की कुल मासिक आय में लगभग 15 से 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.

विज्ञापन

प्रस्ताव के खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने खोला मोर्चा

रेलवे बोर्ड के प्रस्तावित बदलाव का ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) ने कड़ा विरोध किया है. फेडरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि आधुनिक तकनीक और हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के साथ लोको पायलटों की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई हैं. उनका तर्क है कि 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाते समय एक क्षण की चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है. ऐसे में मानसिक दबाव को आधार बनाकर रनिंग अलाउंस में कमी करना कर्मचारियों के हितों के विपरीत होगा. उनका कहना है कि यदि कार्य का तनाव बढ़ा है तो भत्तों में बढ़ोतरी होनी चाहिए, न कि कटौती.

इसके साथ ही कर्मचारी संगठनों ने रेलवे प्रशासन से रनिंग स्टाफ के 20 हजार से अधिक रिक्त पदों पर जल्द स्थायी नियुक्तियां करने की मांग की है. यूनियन का यह भी कहना है कि हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन करने वाले लोको पायलटों के लिए विशेष ‘स्ट्रेस-रिस्क अलाउंस’ लागू किया जाना चाहिए, ताकि उनकी अतिरिक्त जिम्मेदारियों और कार्य के दबाव को उचित आर्थिक मान्यता मिल सके.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ