भारत और कनाडा ने तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है. मिली जानकारी के अनुसार पिछले हफ्ते राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ओटावा का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने कनाडा की एनएसए नताली ड्रौइन से मुलाकात की थी. दोनों के बीच हुई इस मीटिंग में भारत और कनाडा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए़.
बता दें कि साल 2023 में भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव आ गया था. जिसके जिम्मेदार तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो थे. ट्रूडो ने भारत और भारतीय अधिकारियों पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने के आरोप लगाए थे. जिसके बाद से ही दोनों देशों के बीच खटास आ गई थी. वहीं, अब लगभग 3 साल बाद एक बार फिर से मार्क कार्नी के नेतृत्व में भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार हो रहा है.
8 फरवरी को हुई अहम मुलाकात
मिली जानकारी के अनुसार, 8 फरवरी, 2026 को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ओटावा में कनाडा के प्रधानमंत्री की उप सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नताली ड्रौइन से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग को दिशा देने के लिए एक साझा कार्य योजना पर अपनी सहमति जताई है. इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने ये घोषणा की है कि दोनों देश एक-दूसरे के देशों में सुरक्षा संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी सहमत हुए हैं.
बैठक में क्या-क्या रहा खास?
- भारत-कनाडा के बीच हुई इस बैठक को दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अहम कदम माना जा रहा है. एनएसए अजीत डोभाल की ओटावा यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दोनों पक्ष अगले महीने की शुरुआत में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की संभावित भारत यात्रा की तैयारियों में जुटे हुए हैं.
- वहीं, विदेश मंत्रालय द्वारा भी अजीत डोभाल और नताली ड्रौइन के बीच हुई बैठक को लेकर एक बयान शेयर किया है. जिसमें उन्होंने कहा है कि दोनों पक्षों ने अपने देशों और नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई पहलों पर हुई प्रगति को स्वीकार किया है.
- मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उन्होंने राष्ट्री सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग का मार्गदर्शन करने और संबंधित प्राथमिकताओं पर व्यावहारिक सहयोग को लेकर एक साझा कार्य योजना पर सहमति जताई है.
- इसके अलावा यह भी जानकारी दी गई कि बैठक के दौरान यह भी सहमति बनी है कि प्रत्येक देश सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करेगा और उनकी संबंधित एजेंसियां कामकाजी संबंधों को और अधिक मजबूत करेंगी.
- वहीं, दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा नीति और साइबर सुरक्षा मुद्दों पर सूचना साझाकरण पर सहयोग को औपचारिक रूप देने के साथ-साथ घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप धोखाधड़ी और आव्रजन प्रवर्तन (Immigration enforcement) से संबंधित सहयोग पर चर्चा जारी रखने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है.
क्यों अहम मानी जा रही है ये बैठक?
राजनीतिक बयानबाजी, सुरक्षा चिंताओं और संवेदनशील मुद्दों को कूटनीतिक रूप से कैसे मैनेज किया जाए, इस पर असहमति के कारण भी भारत और कनाडा के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे. इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप, जुड़ाव में भी कमी आई. ऐसे में इस सुरक्षा वार्ता को दोनों देशों के बीच एक पॉजिटिव संकेत माना है कि दोनों देशों की सरकारें अशांति से आगे बढ़ने और स्थिरता को बहाल करने पर सहमत हैं.
खालिस्तानी समूहों पर भी चर्चा
अजीत डोभाल और उनके कनाडाई समकक्ष ने उत्तरी अमेरिकी देश में सक्रिय खालिस्तानी समूहों के मुद्दे पर भी चर्चा की. डोभाल ने प्रवासी समुदाय के भीतर चरमपंथी चंदा जुटाने, धमकियों और दुष्प्रचार से जुड़े मामले, दस्तावेजों की धोखाधड़ी और भारत को निशाना बनाने वाले जबरन वसूली के मुद्दे पर भी चर्चा की. अजीत डोभाल की ड्रौइन और कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगरी के साथ भी बातचीत हुई. जिसके बाद बताया गया कि कनाडाई सरकार ने स्वीकार किया है कि भारत को टारगेट बनाकर किया गया हिंसक चरमपंथ न केवल एक राजनयिक समस्या है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का भी मुद्दा है. कनाडा में खालिस्तानियों की मौजूदगी और उनके द्वारा फैलाई जा रही नफरत लंबे समय से भारत-कनाडा के संबंधों के लिए कांटा रही है.
भारत और कनाडा ने तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है. मिली जानकारी के अनुसार पिछले हफ्ते राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ओटावा का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने कनाडा की एनएसए नताली ड्रौइन से मुलाकात की थी. दोनों के बीच हुई इस मीटिंग में भारत और कनाडा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए़.
बता दें कि साल 2023 में भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव आ गया था. जिसके जिम्मेदार तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो थे. ट्रूडो ने भारत और भारतीय अधिकारियों पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने के आरोप लगाए थे. जिसके बाद से ही दोनों देशों के बीच खटास आ गई थी. वहीं, अब लगभग 3 साल बाद एक बार फिर से मार्क कार्नी के नेतृत्व में भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार हो रहा है.
8 फरवरी को हुई अहम मुलाकात
मिली जानकारी के अनुसार, 8 फरवरी, 2026 को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ओटावा में कनाडा के प्रधानमंत्री की उप सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नताली ड्रौइन से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग को दिशा देने के लिए एक साझा कार्य योजना पर अपनी सहमति जताई है. इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने ये घोषणा की है कि दोनों देश एक-दूसरे के देशों में सुरक्षा संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी सहमत हुए हैं.
बैठक में क्या-क्या रहा खास?
- भारत-कनाडा के बीच हुई इस बैठक को दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अहम कदम माना जा रहा है. एनएसए अजीत डोभाल की ओटावा यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दोनों पक्ष अगले महीने की शुरुआत में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की संभावित भारत यात्रा की तैयारियों में जुटे हुए हैं.
- वहीं, विदेश मंत्रालय द्वारा भी अजीत डोभाल और नताली ड्रौइन के बीच हुई बैठक को लेकर एक बयान शेयर किया है. जिसमें उन्होंने कहा है कि दोनों पक्षों ने अपने देशों और नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई पहलों पर हुई प्रगति को स्वीकार किया है.
- मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उन्होंने राष्ट्री सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मुद्दों पर द्विपक्षीय सहयोग का मार्गदर्शन करने और संबंधित प्राथमिकताओं पर व्यावहारिक सहयोग को लेकर एक साझा कार्य योजना पर सहमति जताई है.
- इसके अलावा यह भी जानकारी दी गई कि बैठक के दौरान यह भी सहमति बनी है कि प्रत्येक देश सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करेगा और उनकी संबंधित एजेंसियां कामकाजी संबंधों को और अधिक मजबूत करेंगी.
- वहीं, दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा नीति और साइबर सुरक्षा मुद्दों पर सूचना साझाकरण पर सहयोग को औपचारिक रूप देने के साथ-साथ घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप धोखाधड़ी और आव्रजन प्रवर्तन (Immigration enforcement) से संबंधित सहयोग पर चर्चा जारी रखने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है.
क्यों अहम मानी जा रही है ये बैठक?
राजनीतिक बयानबाजी, सुरक्षा चिंताओं और संवेदनशील मुद्दों को कूटनीतिक रूप से कैसे मैनेज किया जाए, इस पर असहमति के कारण भी भारत और कनाडा के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे. इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप, जुड़ाव में भी कमी आई. ऐसे में इस सुरक्षा वार्ता को दोनों देशों के बीच एक पॉजिटिव संकेत माना है कि दोनों देशों की सरकारें अशांति से आगे बढ़ने और स्थिरता को बहाल करने पर सहमत हैं.
खालिस्तानी समूहों पर भी चर्चा
अजीत डोभाल और उनके कनाडाई समकक्ष ने उत्तरी अमेरिकी देश में सक्रिय खालिस्तानी समूहों के मुद्दे पर भी चर्चा की. डोभाल ने प्रवासी समुदाय के भीतर चरमपंथी चंदा जुटाने, धमकियों और दुष्प्रचार से जुड़े मामले, दस्तावेजों की धोखाधड़ी और भारत को निशाना बनाने वाले जबरन वसूली के मुद्दे पर भी चर्चा की. अजीत डोभाल की ड्रौइन और कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगरी के साथ भी बातचीत हुई. जिसके बाद बताया गया कि कनाडाई सरकार ने स्वीकार किया है कि भारत को टारगेट बनाकर किया गया हिंसक चरमपंथ न केवल एक राजनयिक समस्या है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का भी मुद्दा है. कनाडा में खालिस्तानियों की मौजूदगी और उनके द्वारा फैलाई जा रही नफरत लंबे समय से भारत-कनाडा के संबंधों के लिए कांटा रही है.