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NCERT की किताब से हटेगा विवादित हिस्सा! सरकार गंभीर, जिम्मेदार अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई

NCERT Book: किताब में न्यायपालिका के भ्रष्टाचार संबंधी विवादास्पद सामग्री को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया हुआ है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय गंभीरता से विचार कर रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार एनसीईआरटी (NCERT) की कक्षा 8वीं की किताब से न्यायपालिका को लेकर लिखे गए विवादित हिस्से को हटाने पर विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक किताब में न्यायपालिका के भ्रष्टाचार संबंधी विवादास्पद सामग्री को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया हुआ है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय गंभीरता से विचार कर रहा है और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. हालांकि अभी तक इस फैसले को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद किताब से विवादित हिस्से को जल्द हटाया जा सकता है.

एनसीईआरटी के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक, जिसमें ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर एक खंड शामिल था, को बिक्री से हटा दिया गया है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 25 फरवरी को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में कक्षा आठ के छात्रों को ‘भारतीय न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ सिखाए जाने के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया.

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पीटीआई से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, ‘इस लेख के संदर्भ में, मुझे लगता है कि यह चौंकाने वाला है कि एनसीईआरटी को पाठ्यपुस्तक में ऐसी कोई चीज शामिल करनी चाहिए. पाठ्यपुस्तकें बच्चों को हमारे समाज के बारे में शिक्षित करने के लिए होती हैं. अगर वे वास्तव में शिक्षित करना चाहते हैं, तो उन्हें इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि लगभग 40 प्रतिशत राजनेताओं का आपराधिक पृष्ठभूमि है.’

उन्होंने कहा, ‘यह स्वतंत्रता प्राप्ति के समय हमने निश्चित रूप से अपेक्षा नहीं की थी कि इस देश पर शासन करने वाले लोग कानूनभंगकर्ता हो सकते हैं, जो अंततः विधायक बन जाएंगे. लेकिन न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में बोलना, मुझे लगता है, संस्था को कमजोर करता है… भ्रष्टाचार हर जगह मौजूद है, लेकिन मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कार्यपालिका या राजनीति की तुलना में बहुत कम है. इसलिए मेरे लिए पूरी तरह अस्पष्ट है कि इस अध्याय को शामिल करने का उद्देश्य क्या था. लेकिन मुझे यकीन है कि जस्टिस सूर्या कांत को एनसीईआरटी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने इसे शामिल करने का फैसला किया, और उन्हें आपराधिक अवमानना के लिए जवाबदेह ठहराने के कारण बताने के लिए अवमानना नोटिस जारी करना चाहिए.’

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First published on: Feb 25, 2026 04:08 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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