भीषण भूकंप-तूफान ने रास्ता बदला; 52117 मील की रफ्तार से आया था Asteroid, नासा का ताजा अपडेट

Asteroid Earth Collision: अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने एस्ट्रॉयड को लेकर रेड अलर्ट दिया था। उसी एस्ट्रॉयड को लेकर अब ताजा अपडेट सामने आया है। इस अपडेट में बताया गया है कि एस्ट्रॉयड धरती से टकराया या नहीं और जब यह धरती के पास आया तो क्या हुआ?

NASA Update on Asteroid Collision

धरती की ओर लगातार एस्ट्रॉयड बढ़ रहे हैं।

विज्ञापन

NASA Update on Asteroid Collision With Earth: भगवान का शुक्र है कि धरती पर मंडरा रही आफत टल रही। भीषण तूफान और भूकंप आने की चेतावनी थी। अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने धरती पर जलजला आने के आसार जताए थे, लेकिन मौत ने अपना रास्ता बदल लिया। नासा ने उस एस्ट्रॉयड को लेकर ताजा अपडेट दिया है, जो बीती रात धरती से टकराने वाला था। यह एस्ट्रॉयड धरती के पास से गुजरा, लेकिन इसने अपना रास्ता बदल लिया। इसका टकराव धरती से नहीं हुआ। यह एस्ट्रॉयड 52117 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से धरती की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन यह धरती को क्रॉस करके आगे निकल गया। इस दौरान न कोई सौर तूफान आया और न ही किसी तरह की हलचल हुई कि एस्ट्रॉयड का रास्ता बदल पाता। वैज्ञानिकों ने इस एस्ट्रॉयड पर निगरानी रखी और धरती के पास से गुजरने के दौरान हुई हलचलों को ट्रैक किया।

यह भी पढ़ें:अंतरिक्ष से क्यों नहीं लौटा कुत्ता? जानें कब भेजा गया था और स्पेस में उसके साथ क्या हुआ‌?

विज्ञापन

850 फीट बड़ा एस्ट्रॉयड वैज्ञानिकों ने किया ट्रैक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 18 नवंबर की रात धरती के पास से गुजरे एस्ट्रॉयड का नाम 2023 WK3 था। इसे लेकर नासा ने रेड अलर्ट जारी किया था। इस एस्ट्रॉयड का 850 फीट था और यह धरती से करीब 6.16 मिलियन किलोमीटर दूर था। कैलिफोर्निया की जेट प्रपल्शन लैब (JPL) के रडार और ऑप्टिकल दूरबीनों ने इस एस्ट्रॉयड को ट्रैक किया था और इसके धरती से टकराने का अलर्ट दिया था, लेकिन नासा ने इस एस्ट्रॉयड से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं होने की संभावना जातई थी। नासा की ओर से कहा गया था कि बेशक यह धरती से 6.16 मिलियन किलोमीटर दूर था, लेकिन यह धरती के लिए सुरक्षित था, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के एस्ट्रॉयड भविष्य में धरती पर खतरा बनकर मंडरा सकते हैं। बेशक एस्ट्रॉयड धरती के लिए खतरा बन जाते हैं, लेकिन इनकी ट्रैकिंग करने से अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को रिसर्च के लिए जरूरी डेटा मिलता है।

क्या एस्ट्रॉयड वाकई खतरनाक हो सकते हैं?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एस्ट्रॉयड चट्टानों का ग्रुप होते हैं, जिन्हें नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट्स (NEO) कहा जाता है। यह एस्ट्रॉयड सूरज की परिक्रमा करते रहते हैं। 4.6 बिलियन साल पहले जब सौरमंडल बना था तो एस्ट्रॉयड बृहस्पति ग्रह के आस-पास मंडराने लगे। बृहस्पति ग्रह की ग्रैविटी में रहने के कारण यह एस्ट्रॉयड ग्रह नहीं बन पाए, लेकिन सूर्य की ग्रैविटी से निकलकर यह एस्ट्रॉयड धरती की और बढ़ने लगे हैं। इनकी स्पीड इतनी तेज और आकार इतना बड़ा होता है कि अगर यह धरती से टकरा जाएं तो धरती पर जलजला आने का खतरा पैदा हो जाता है। आज से 6 करोड़ साल पहले एक एस्ट्रॉयड धरती से टकराया था तो धरती से डायनासोर विलुप्त हो गए थे। अब साल 2029 में ऐसे ही एक एस्ट्रॉयड के धरती से टकराने के आसार बने हुए हैं। इस एस्ट्रॉयड को लेकर नासा लगातार अपडेट दे रहा है। भारत की स्पेस एजेंसी इसरो भी लगातार इसे ट्रैक कर रही है।

विज्ञापन

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ