मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पेट्रोलियम, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी समेत कई अन्य मंत्री मौजूद रहे. इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान आवश्यक संसाधनों की बिना रुकावट आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स स्टेबलाइजेशन और देशव्यापी डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया.
पीएम मोदी की मीटिंग में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
- बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की स्थिति और उससे निपटने के उपायों की समीक्षा की गई.
- कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात और अब तक उठाए गए तथा प्रस्तावित कदमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी.
- कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSMEs, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन पर संभावित प्रभाव पर चर्चा हुई.
- देश की समग्र मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति और आगे उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा की गई.
- पश्चिम एशिया संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया गया.
- आम लोगों के लिए जरूरी वस्तुओं—खाद्य, ऊर्जा और ईंधन—की उपलब्धता की विस्तृत समीक्षा की गई.
- आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म रणनीतियों पर चर्चा हुई.
- खरीफ सीजन के लिए किसानों को उर्वरक की उपलब्धता और जरूरतों का आकलन किया गया.
- पिछले वर्षों में बनाए गए उर्वरक स्टॉक के चलते समय पर आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने की बात कही गई.
- भविष्य के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार किया गया.
- सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक होने से बिजली की कमी नहीं होगी.
- केमिकल, फार्मा, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य इंडस्ट्री के लिए आयात के स्रोतों को विविध बनाने पर चर्चा हुई.
- भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए निर्यात बाजार विकसित करने की योजना.
- विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित कदमों को जल्द लागू करने की तैयारी.
- प्रधानमंत्री ने “Whole of Government Approach” के तहत मंत्रियों और सचिवों का एक समर्पित समूह बनाने के निर्देश दिए.
- सेक्टर-वार समूहों को सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ समन्वय में काम करने को कहा गया.
- प्रधानमंत्री ने कहा—पश्चिम एशिया का संघर्ष लगातार बदलती स्थिति है, जिसका असर पूरी दुनिया पर है.
- नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी एजेंसियों को मिलकर काम करने के निर्देश.
- राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने और जमाखोरी व कालाबाज़ारी रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए.
बिना रुकावट ऊर्जा आपूर्ति पर जोर
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मीटिंग में अधिकारियों ने पीएम मोदी को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम से उत्पन्न संभावित बाधाओं से निपटने की तैयारियों पर जानकारी दी. सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है ताकि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत रहे और आपूर्ति श्रृंखलाएं लचीली बनी रहें. बैठक का मकसद उपभोक्ताओं और प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों पर ईरान संकट का असर कम से कम प्रभाव सुनिश्चित करना था.
पीएम मोदी ने की शांति की अपील
12 मार्च को पीएम मोदी ने कहा था कि मध्य पूर्व युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जो किसी भी देश के लिए कठिन परीक्षा है. उन्होंने शांति, धैर्य और जन जागरूकता से स्थिति संभालने पर बल दिया और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधाओं को दूर करने के निरंतर प्रयासों का जिक्र किया. ईरान के साथ जारी अमेरिका और इजरायल की लड़ाई अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला शुरू किया था.
यह भी पढ़ें: मायावती का बड़ा दांव: MP, बिहार और छत्तीसगढ़ के लिए बनाया ‘सीक्रेट प्लान’
ईरान ने ब्लॉक किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी पड़ोसियों पर जवाबी कार्रवाई की, जिससे वैश्विक ऊर्जा मार्ग कहे जाना वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी बाधित हो गया, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ा है. संघर्ष प्रारंभ से पीएम मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल व ईरान के नेताओं से फोन पर बात की. ईरान ने भारत के जहाजों को होर्मुज में सुरक्षित निकलने के लिए रास्ता दिया है.
(इनपुट: कुमार गौरव)
मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पेट्रोलियम, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी समेत कई अन्य मंत्री मौजूद रहे. इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान आवश्यक संसाधनों की बिना रुकावट आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स स्टेबलाइजेशन और देशव्यापी डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया.
पीएम मोदी की मीटिंग में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
- बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की स्थिति और उससे निपटने के उपायों की समीक्षा की गई.
- कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात और अब तक उठाए गए तथा प्रस्तावित कदमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी.
- कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, MSMEs, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और सप्लाई चेन पर संभावित प्रभाव पर चर्चा हुई.
- देश की समग्र मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति और आगे उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा की गई.
- पश्चिम एशिया संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया गया.
- आम लोगों के लिए जरूरी वस्तुओं—खाद्य, ऊर्जा और ईंधन—की उपलब्धता की विस्तृत समीक्षा की गई.
- आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म रणनीतियों पर चर्चा हुई.
- खरीफ सीजन के लिए किसानों को उर्वरक की उपलब्धता और जरूरतों का आकलन किया गया.
- पिछले वर्षों में बनाए गए उर्वरक स्टॉक के चलते समय पर आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होने की बात कही गई.
- भविष्य के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार किया गया.
- सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक होने से बिजली की कमी नहीं होगी.
- केमिकल, फार्मा, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य इंडस्ट्री के लिए आयात के स्रोतों को विविध बनाने पर चर्चा हुई.
- भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए निर्यात बाजार विकसित करने की योजना.
- विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित कदमों को जल्द लागू करने की तैयारी.
- प्रधानमंत्री ने “Whole of Government Approach” के तहत मंत्रियों और सचिवों का एक समर्पित समूह बनाने के निर्देश दिए.
- सेक्टर-वार समूहों को सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ समन्वय में काम करने को कहा गया.
- प्रधानमंत्री ने कहा—पश्चिम एशिया का संघर्ष लगातार बदलती स्थिति है, जिसका असर पूरी दुनिया पर है.
- नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी एजेंसियों को मिलकर काम करने के निर्देश.
- राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने और जमाखोरी व कालाबाज़ारी रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए.
बिना रुकावट ऊर्जा आपूर्ति पर जोर
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मीटिंग में अधिकारियों ने पीएम मोदी को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम से उत्पन्न संभावित बाधाओं से निपटने की तैयारियों पर जानकारी दी. सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है ताकि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत रहे और आपूर्ति श्रृंखलाएं लचीली बनी रहें. बैठक का मकसद उपभोक्ताओं और प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों पर ईरान संकट का असर कम से कम प्रभाव सुनिश्चित करना था.
पीएम मोदी ने की शांति की अपील
12 मार्च को पीएम मोदी ने कहा था कि मध्य पूर्व युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जो किसी भी देश के लिए कठिन परीक्षा है. उन्होंने शांति, धैर्य और जन जागरूकता से स्थिति संभालने पर बल दिया और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधाओं को दूर करने के निरंतर प्रयासों का जिक्र किया. ईरान के साथ जारी अमेरिका और इजरायल की लड़ाई अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला शुरू किया था.
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ईरान ने ब्लॉक किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी पड़ोसियों पर जवाबी कार्रवाई की, जिससे वैश्विक ऊर्जा मार्ग कहे जाना वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी बाधित हो गया, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ा है. संघर्ष प्रारंभ से पीएम मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल व ईरान के नेताओं से फोन पर बात की. ईरान ने भारत के जहाजों को होर्मुज में सुरक्षित निकलने के लिए रास्ता दिया है.
(इनपुट: कुमार गौरव)