क्या आप चुनाव लड़ेंगे? इस सवाल के जवाब में कहा था कि चुनाव नहीं चीनियों से लड़ता हूं और आज भी यही जवाब है। पॉलिटिक्स मेरे बस की बात नहीं। सब की अलग-अलग रुचियां, नेचर, पसंद होती हैं। जिसका जहां मन करे, वहां जाना चाहिए, पर मैं नहीं जाना चाहता।
Manoj Mukund Naravane Exclusive Interview भारतीय सेना के 28वें चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 22 अप्रैल को अपनी एक बुक लॉन्च की है। इस बुक का नाम ‘द क्यूरियस एंड द क्लासीफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ है। इस बुक में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी दिलचस्प कहानियां हैं।
सेना के तीनों अंगों के जुड़े मिथक और अनसुने रहस्यों का जिक्र इसमें मिल जाएगा। जनरल नरवणे की यह किताब कांग्रेस सांसद शशि थरूर की ‘ए वंडरलैंड ऑफ वर्ड्स’ से प्रेरित है। इस किताब पर बातचीत करने के लिए जनरल नरवणे आज News 24 के मंच से देशभर की जनता के साथ लाइव जुड़े।
आइए News 24 के एग्जीक्यूटिव एडिटर मानक गुप्ता से जनरल नरवणे की बातचीत से जुड़े पल-पल के लाइव अपडेट्स देखते हैं…
वॉर हमेशा आखिरी विकल्प होना चाहिए। बातचीत करके समस्या का हल निकालना चाहिए। युद्ध समाधान नहीं हो सकता। जब भी समझौते होते हैं तो दोनों पक्षों के लिए बराबर होना चाहिए। जीत हासिल करने का जज्बा होना चाहिए। समझौता होने पर दोनों पक्ष जीतते हैं, क्योंकि वे भलाई में समझौता करते हैं।
कितने फाइटर जेट गिरे? कितनी मिसाइल गिरीं, यह क्यों बताएं? इससे उन्हें पता चलेगा कि भारतीय सेना के कौन-से हथियार अच्छे हैं और कौन-से नहीं? ऐसे सीक्रेट जनता को नहीं बताए जा सकते।
आज टाइम नहीं है, बहुत लंबी डिस्कशन का मुद्दा है। फिर कभी करेंगे।
चीन ने हमारी एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। चीन के साथ बाउंड्री विवाद है। बाउंड्री और बॉर्डर में अंतर है। बाउंड्री विवाद सुलझाने के लिए चीन से बातचीत होनी चाहिए।
सरकार एक हद तक, मुद्दे को देखते हुए फ्री हैंड देती है। फ्री हैंड मिलिट्री और पॉलिटिकल डिसीजन होता है। किसी मकसद को पूरा करने के लिए यह दिया जाता है। फ्री हैंड की कुछ सीमाएं होती हैं, ऐसा नहीं कि परमाणु हथियार से हमला कर दे।
फ्री हैंड का मतलब यह नहीं कि जो दिल आए वो करो। जो चाहो वो करो। फ्री हैंड देश की भलाई के लिए, जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए, देश की संप्रभुता अखंडता इज्जत और रिश्तों को ध्यान में रखकर काम करने के लिए दिया जाता है।
मुझे नहीं पता कहां से आई? मेरी किताब की कोई कॉपी आज तक नहीं छपी है। मैंने खुद नहीं देखा उस कॉपी को। राहुल गांधी जानें और आप जानें कि कॉपी कहां से आई?
पहल गैलेंटरी अवार्ड मेरी यूनिट के जवान को मिला है। अग्निवीर कोई बड़ा बदलाव नहीं है, सिर्फ जवानों को संबोधित करने को नया नाम मिला है। पहले जवान कहते थे, अब अग्निवीर कहलाते हैं।
जनरल नरवणे ने कहा कि किताब लिखना मेरा काम है। पब्लिशर को उसकी मैन्युस्क्रिप्ट देना काम है और यह करके मैं संतुष्ट हूं। परमिशन आदि के बारे में सोचा नहीं।
आर्म्ड फोर्स को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए। इसे राजनीति से दूर रखने की कोशिश रही है। यही सेना की ताकत है। अगर इस ताकत को बनाए रखना है तो सभी राजनेताओं को इसका ध्यान रखना होगा।
शशि थरूर ने अपनी किताब में मोर्स कोड जैसी कई सीक्रेट चीजों का जिक्र किया। एक चैप्टर उन्होंने लिखा है इस पर, जिसे पढ़ने के बाद सेना के अंदर के किस्से लोगों तक पहुंचाने के लिए किताब लिखी।
मुगलों और सिखों के बीच लड़ाई होती थी। उस समय पुलों से गुजरते हुए सेना जाती थी। सिख सेना ने मुगल सेना को अपने पीछे आने से रोकने के लिए पुलों को उखाड़ दिया था। उस समय सेना को आदेश देते हुए कहा जाता था चक दे फट्टे, जिसका मतलब होता था कि पुल उखाड़ दो। आज इसका इस्तेमाल एनकरेज करने के लिए होता है।
मनोज नरवणे ने सेना से जुड़े किस्सों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किताब लिखी, ताकि लोगों को मिलिट्री की क्लासिफाइड जानकारियां मिलें, लेकिन रोचक किस्से ही बताए गए हैं।










