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ManMohan Singh Death: मनमोहन सिंह ने कैसे बदल दिया देश का ‘अर्थशास्त्र’, लाइसेंस राज खत्म करने का जाता है श्रेय

ManMohan Singh Death: मनमोहन सिंह को देश में आर्थिक उदारीकरण और आर्थिक सुधारों का जनक कहा जाता है। 1999 में कांग्रेस की टिकट पर वह लोकसभा चुनाव लड़े थे।

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ManMohan Singh Death: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार को दिल्ली के AIIMS में निधन हो गया है। दो बार बाईपास सर्जरी होने के बाद वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 26 सितंबर 1932 में जन्मे मनमोहन दो बार देश के प्रधानमंत्री रहे, उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए  देश के अर्थशास्त्र की दशा और दिशा सुधारने के लिए काफी काम किया था।

देश में आर्थिक उदारीकरण और आर्थिक सुधारों के थे जनक 

जानकारी के अनुसार मनमोहन सिंह को देश में आर्थिक उदारीकरण और आर्थिक सुधारों का जनक कहा जाता है। दरअसल, कांग्रेस की टिकट पर 1991 में वे राज्य सभा पहुंचे थे। इसी साल उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के नए युग की शुरुआत की थी। अपने कार्यकाल में उन्होंने दशकों से बंद भारतीय अर्थव्यवस्था को खोलने यानी आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की थी।

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1999 में कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था

मनमोहन सिंह 1996 तक वित्त मंत्री रहे थे। इसके बाद 1999 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गए थे। इसके बाद साल 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में वह देश के 13वें प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने न सिर्फ अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया, बल्कि साल 2009 से 2014 तक वह दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने।

विदेशी निवेश को प्रोत्साहित कर किए टैक्स कम

मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में लाइसेंस राज का खत्म किया था। वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने टैक्स कम किए, विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया था। साल 2004 में प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के साथ मिलकर अर्थव्यवस्था पर काफी काम किया, इस दौर को भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वर्णकाल माना जाता है।

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First published on: Dec 26, 2024 10:48 PM

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Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.

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