News24 हिंदी
न्यूज 24 डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।
Read More---विज्ञापन---
अक्सर जब महिलाएं ईसीजी कराने जाती हैं तो उन्हें कपड़े उतारने पड़ते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि छाती पर इलेक्ट्रोड्स लगाने होते हैं। केरल की रहने वाली एक छात्रा ने जब एक महिला को ईसीजी के दौरान कपड़े उतारने में असहज देखा, तो उसने इसका समाधान खोजने का फैसला किया। अब इस छात्रा ने इसका समाधान खोज लिया है और एक ऐसा गाउन बनाया है, जिससे महिलाओं को कपड़े उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
केरल के कोच्चि की रहने वाली मालविका बायजू, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID) अहमदाबाद से पढ़ाई कर रही हैं। मालविका ने बायोडिग्रेडेबल ईसीजी इलेक्ट्रोड और महिलाओं के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया गाउन तैयार किया है। इस खोज के लिए मालविका को सब्सिडी भी दी गई है। दो संस्थाओं ने मालविका की मदद की, जिसके बाद उन्होंने इस खोज को पूरा किया।
दरअसल, जांच के दौरान ईसीजी इलेक्ट्रोड का भारी मात्रा में उपयोग होता है। मालविका का कहना है कि ये इलेक्ट्रोड लगभग हमेशा सिंथेटिक पॉलिमर से बने होते हैं और इन्हें रिसाइकल नहीं किया जा सकता। मेडिकल कचरे में प्लास्टिक की भारी मात्रा देखकर उन्हें चिंता होने लगी।
इसके बाद करीब डेढ़ साल तक मालविका इस समस्या का समाधान खोजने में लगी रहीं। पहले उन्होंने मेडिकल टेक्नीशियन और ईसीजी टेक्नीशियन के साथ काम कर बारीकियों को समझा। इसके बाद उन्हें अपने घर में ही खाने की एक ऐसी चीज मिली, जो उनकी इस खोज में काफी मददगार साबित हुई। मालविका ने कहा कि कप्पा या टैपिओका केरल का एक मुख्य खाद्य पदार्थ है। एक दिन घर में उन्होंने देखा कि इसमें मिलने वाला घुलनशील स्टार्च यूं ही फेंक दिया जाता है। उन्होंने इसका परीक्षण किया तो पता चला कि एक लीटर में लगभग 86 मिलीग्राम घुलनशील स्टार्च था।
इसके बाद मालविका ने टैपिओका स्टार्च से एक बायोपॉलिमर फिल्म विकसित की है, जो ईसीजी इलेक्ट्रोड में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक प्लास्टिक की जगह ले सकता है। उनका कहना था कि वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे इलेक्ट्रोड को समाप्त होने में 35-45 साल लगते हैं जबकि उनके द्वारा विकसित की गई बायोपॉलिमर फिल्म मात्र 40-55 दिन में नष्ट हो जाती है।
ईसीजी इलेक्ट्रोड्स की जानकारी जुटाते समय मालविका की नजर एक महिला पर पड़ी जो ईसीजी के दौरान कपड़े उतारने में असहज महसूस कर रही थी। इसके बाद मालविका ने जेबों और थैलियों वाला एक गाउन डिजाइन किया, जिससे मरीजों को कपड़े उतारे बिना ही सेंसर लगाए जा सकते हैं। मालविका ने बताया कि यह एक कठिन समस्या का व्यावहारिक समाधान है। इस डिजाइन को भारतीय पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है।
यह भी पढ़ें : भारत और अमेरिकी कंपनी में होगी 1 अरब डॉलर की डील, सेना को मिलेगी मजबूती
मालविका का कहना है कि भारत में उनके शोध के लिए संसाधन बहुत सीमित हैं, इसलिए वह विदेश में पीएचडी करना चाहती हैं ताकि अपने डिज़ाइनों को और बेहतर बना सकें। इसके बाद ही उन्हें व्यावसायिक रूप से बाज़ार में उतारा जा सकेगा। मालविका ने बताया कि वह फैशन डिजाइनर बनना चाहती थीं लेकिन उनके माता-पिता इसके खिलाफ थे इसलिए उन्होंने पहले अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की और फिर NID में दाखिला लिया।
न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।