जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी का लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा पुनर्गठन कर दिया गया है. 25 फरवरी को लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, कमेटी के तीन सदस्यों में से एक, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव 6 मार्च को रिटायर होने वाले हैं. उनकी जगह अब बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर को शामिल किया गया है. यह जांच समिति पिछले साल अगस्त में बनाई गई थी, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 152 सांसदों ने उस समय दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था.
14 मार्च को सामने आया था विवाद
मामला तब सामने आया था जब 14 मार्च को दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना के दौरान इमरजेंसी सेवाओं को कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिली थी. जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह उस वक्त भोपाल में थे और वह पैसा उनका या उनके परिवार का नहीं है. विवाद बढ़ने के बाद उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था. भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के 152 सांसदों ने एकजुट होकर उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया था.
महाभियोग प्रस्ताव किया स्वीकार
महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा था कि कमेटी जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देगी. हालांकि जांच में देरी हुई क्योंकि जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में इस समिति की वैधता को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को उनकी याचिका खारिज कर दी. इसके बाद जस्टिस वर्मा कमेटी के सामने पेश हुए और अपना पक्ष रखा. समिति ने इस दौरान कई अन्य गवाहों से भी पूछताछ की. अब, जस्टिस श्रीवास्तव के रिटायर होने के कारण कमेटी का पुनर्गठन किया गया है.
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी का लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा पुनर्गठन कर दिया गया है. 25 फरवरी को लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, कमेटी के तीन सदस्यों में से एक, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव 6 मार्च को रिटायर होने वाले हैं. उनकी जगह अब बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर को शामिल किया गया है. यह जांच समिति पिछले साल अगस्त में बनाई गई थी, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 152 सांसदों ने उस समय दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था.
14 मार्च को सामने आया था विवाद
मामला तब सामने आया था जब 14 मार्च को दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना के दौरान इमरजेंसी सेवाओं को कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिली थी. जस्टिस वर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह उस वक्त भोपाल में थे और वह पैसा उनका या उनके परिवार का नहीं है. विवाद बढ़ने के बाद उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था. भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के 152 सांसदों ने एकजुट होकर उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया था.
महाभियोग प्रस्ताव किया स्वीकार
महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा था कि कमेटी जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देगी. हालांकि जांच में देरी हुई क्योंकि जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में इस समिति की वैधता को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को उनकी याचिका खारिज कर दी. इसके बाद जस्टिस वर्मा कमेटी के सामने पेश हुए और अपना पक्ष रखा. समिति ने इस दौरान कई अन्य गवाहों से भी पूछताछ की. अब, जस्टिस श्रीवास्तव के रिटायर होने के कारण कमेटी का पुनर्गठन किया गया है.