ISRO Launch XPoSat Mission: इसरो ने नए साल के पहले दिन इतिहास रच दिया। भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन ने एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट को आज सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लाॅन्च किया। इसे पीएसएलवी राॅकेट के जरिए पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार यह सैटेलाइट एक्स किरणों का डेटा कलेक्ट करके ब्लैक होल और न्यूट्राॅन स्टार्स का अध्ययन करेगा। इस सैटेलाइट में इसरो ने दो पेलोड और एक्सपेक्ट भी लगाए हैं।
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इसरो ने नासा केे बाद दुनिया का दूसरा इमेजिंग एक्स-रे पोलरिमेट्री मिशन लाॅन्च किया है। इस सैटेलाइट में स्पेस टेक स्टार्टआप ध्रुव स्पेस, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस भी राॅकेट के साथ भेजे हैं। इसरो से मिली जानकारी के अनुसार कुल 10 पेलोड इस राॅकेट के साथ भेजे गए हैं।

जानकारी के अनुसार यह सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में 650 किमी. तक स्थापित करने के बाद राॅकेट की चौथी स्टेज को पृथ्वी की कक्षा में लाएगा। इस सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य विभिन्न खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करना है। यह सैटेलाइट न्यूट्रॉन स्टार्स, ब्लैकहोल, पल्सर विंड नेबुला और उससे निकलने वाले रेडिएशन की स्टडी करेगा। इसके एनिमेशन को समझना बड़ा ही मुश्किल होता है क्योंकि इसका निर्माण फिजिकल प्रोसेस के जरिए होता है।
ISRO Launch XPoSat Mission: इसरो ने नए साल के पहले दिन इतिहास रच दिया। भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन ने एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट को आज सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लाॅन्च किया। इसे पीएसएलवी राॅकेट के जरिए पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार यह सैटेलाइट एक्स किरणों का डेटा कलेक्ट करके ब्लैक होल और न्यूट्राॅन स्टार्स का अध्ययन करेगा। इस सैटेलाइट में इसरो ने दो पेलोड और एक्सपेक्ट भी लगाए हैं।
इसरो ने नासा केे बाद दुनिया का दूसरा इमेजिंग एक्स-रे पोलरिमेट्री मिशन लाॅन्च किया है। इस सैटेलाइट में स्पेस टेक स्टार्टआप ध्रुव स्पेस, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस भी राॅकेट के साथ भेजे हैं। इसरो से मिली जानकारी के अनुसार कुल 10 पेलोड इस राॅकेट के साथ भेजे गए हैं।

जानकारी के अनुसार यह सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में 650 किमी. तक स्थापित करने के बाद राॅकेट की चौथी स्टेज को पृथ्वी की कक्षा में लाएगा। इस सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य विभिन्न खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करना है। यह सैटेलाइट न्यूट्रॉन स्टार्स, ब्लैकहोल, पल्सर विंड नेबुला और उससे निकलने वाले रेडिएशन की स्टडी करेगा। इसके एनिमेशन को समझना बड़ा ही मुश्किल होता है क्योंकि इसका निर्माण फिजिकल प्रोसेस के जरिए होता है।