रूस-यूक्रेन, अजरबैजान-अर्मिनिया, अमेरिका-ईरान, इजराइल-हमास और भारत-पाकिस्तान का आॉपरेशन सिंदूर… इन सभी युद्ध में एक बात की समानता नजर आई की ज्यादा से ज्यादा ड्रोन का इस्तेमाल दुश्मन को खत्म करने के लिए किया गया. यानी भविष्य के युद्ध के लिए इन देशों ने यह सबक भी दिया कि अगर आपको कम समय में युद्ध जीतना है तो पुरानी रणनीति छोड़कर युद्ध की नई टेक्नॉलजी को जल्द से जल्द अपनाना ही होगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी देखा गया कि पाकिस्तान की तरफ से सैकड़ों की तादाद में ड्रोन से हमला करने की कोशिश की गई थी लेकिन भारतीय वायुसेना ने उसकी इस नीति को पूरी तरह से धराशाही कर दिया था. अब भविष्य के युद्ध को ही देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बेहद खतरनाक कहे जाने वाले ड्रोन, जिसका नाम ही 'काल' है, उसे बहुत जल्द सेना में शामिल करने जा रही है.
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'मेक इन इंडिया' के तहत बनाए गए ड्रोन को 'काल ड्रोन' के साथ ही 'वन वे अटैक ड्रोन' का भी नाम दिया गया है. यह नाम इसलिए भी कि दुश्मन को बर्बाद करने के लिए एकतरफा ही काफी है, दूसरे ड्रोन की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. इस ड्रोन की खासियत यह है कि राजस्थान बॉर्डर से यह करीब एक हजार किलोमीटर दूर सीधा अफगानिस्तान में घुसकर हमला कर सकता है.
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क्या हैं इसकी खासियतें
- 1,000 किलोमीटर की रेंज वाला यह ड्रोन 8-10 घंटे तक हवा में रह सकता है.
- 50 से 60 किलो विस्फोटक ले जाने की क्षमता है.
- 200 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से 5,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ सकता है.
- हाई-रिजोल्यूशन और थर्मल कैमरों के साथ-साथ एडवांस नेविगेशन सूट और एन्क्रिप्टेड डेटासूट से लैस.
- यह आत्मघाती ड्रोन दुश्मन के रडार और जैमर से बचकर सुरक्षित संचालन करने में माहिर है.
इस ड्रोन को मिशन पूरा करने के बाद वापस लाने के लिए नहीं बनाया जाता. यह अपने लक्ष्य तक पहुंचकर हमला करता है.
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रक्षा मामलों के जानकार दिनाकरन पेरी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में युद्ध का एक्शन पूरी तरह से बदल चुका है. देखा गया है कि अब मिसाइल खरीदने की जगह ड्रोन को बनाने या खरीदने में कई देश अपनी दिलच्सपी दिखा रहे है. क्योंकि ऐसे ड्रोन कम खर्च में लंबी दूरी तक हमला कर सकते हैं.
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