राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने देश के विकास मॉडल को लेकर मंगलवार की शाम एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया. उन्होंने विकास को सिर्फ आर्थिक प्रगति तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों की बुनियादी जरूरतों से जोड़ने की बात कही है. मोहन भागवत ने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब समाज के आखिरी व्यक्ति तक जरूरी सुविधाएं पहुंचें और अमीर-गरीब के बीच का अंतर कम से कम हो. भागवत ने कहा कि देश में पहले भी गरीब लोग थे, लेकिन उनकी गरीबी का मतलब यह नहीं था कि वे जीवन की जरूरी चीजों से पूरी तरह वंचित रहते थे.
आरएसएस चीफ मोहन भागवत के मुताबिक, हर व्यक्ति के पास जीवन चलाने के लिए कुछ बुनियादी सुविधाएं जरूर होनी चाहिए. उन्होंने छह जरूरी चीजों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें भोजन, कपड़ा और घर, जीवन के लिए जरूरी शिक्षा, स्वस्थ रहने के लिए दवा, चिकित्सा सुविधा और मेहमानों के सत्कार के साधन शामिल हैं. इनमें से किसी भी जरूरत की कमी नहीं होनी चाहिए.
‘गरीब के पास भी रहने के लिए घर था’
RSS प्रमुख ने कहा, ‘हमारे देश में विकास तो हो रहा है, लेकिन यह मुमकिन नहीं है कि हर कोई एक ही रफ्तार से और एक साथ तरक्की करे. लोग कह सकते हैं कि इतने बड़े समाज में ऐसा करना मुमकिन भी नहीं है. विकास के एक ही स्तर पर हर कोई नहीं हो सकता. फिर भी, विकास के सबसे ऊंचे और सबसे निचले स्तर के बीच का फासला कम से कम होना चाहिए.’
उन्होंने आगे कहा, ‘पहले हमारे देश में गरीब आदमी के पास भी गुजारे के लिए जरूरी चीजों की कमी नहीं थी. उनके पास पेट भरने के लिए काफी खाना होता था. हर व्यक्ति के पास छह चीजें होनी चाहिए- खाना, कपड़ा और घर, जिंदगी जीने के लिए जरूरी शिक्षा, अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए दवा और इलाज की सुविधा और मेहमानों की खातिरदारी करने के साधन. इन छह जरूरी चीजों में से किसी की भी कमी नहीं होनी चाहिए.
‘गरीब-अमीर के बीच का अंतर कम होना चाहिए’
मोहन भागवत कहते हैं, ‘पहले भी हमारे देश में गरीब लोग थे, लेकिन इन छह जरूरतों के मामले में वे ‘गरीब’ नहीं थे. उनके पास भी घर थे, बस फर्क इतना था कि उनकी दीवारें पत्थर की जगह मिट्टी की बनी होती थीं. उनके पास समाज में दूसरों से मिलने-जुलने के लिए काफी अच्छे और ठीक-ठाक कपड़े होते थे. भले ही वे रेशम के कपड़े न पहनते हों, लेकिन उनके पास सूती कपड़े जरूर होते थे. विकास के स्तर में अंतर हो सकता है, लेकिन विकास की सीढ़ी के सबसे ऊंचे और सबसे निचले पायदान के बीच का फासला जितना हो सके, उतना कम होना चाहिए.’