उत्तर प्रदेश कैडर की IAS दिव्या मित्तल ने 13 साल की सर्विस के बाद पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उनका इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है, क्योंकि दिव्या मित्तल का इस्तीफा अभी तक योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्वीकार नहीं किया है. क्योंकि दिव्या मित्तल के इस्तीफे को अभी तक सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (Department of Personnel and Training- DoPT) ने स्वीकार नहीं किया है. इसलिए वे अभी तक पद पर बनी हुई हैं. 1958 के नियम 5(1A) के तहत IAS अफसर का इस्तीफा केंद्र सरकार तभी स्वीकार करती है, जब राज्य सरकार उसे स्वीकार करे और केंद्र सरकार के समक्ष इस्तीफा स्वीकार करने के लिए सिफारिश करे.
क्या दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर करेगी सरकार?
IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर होगा या नहीं, सियासी गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि दिव्या के इस्तीफे को 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया है और न ही सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया दी गई है. दिव्या के मामले में यह स्थिति 2012 बैच के AGMUT कैडर के IAS कन्नन गोपीनाथन का मामला याद दिलाती है. गोपीनाथन ने 7 साल पहले इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका इस्तीफा आज तक स्वीकार नहीं किया गया. वे कांग्रेस जॉइन कर चुके हैं और प्रधानमंत्री मोदी से इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध कर चुके हैं, लेकिन उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया जा रहा है.
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कन्नन गोपीनाथन का इस्तीफा क्यों मंजूर नहीं हुआ?
कन्नन गोपीनाथन का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है, क्योंकि उनके खिलाफ अनुशासत्मक और विभागीय जांच लंबित है. इसलिए वे कागजों में अभी तक पद पर बने हुए हैं. कन्नन गोपीनाथन ने अगस्त 2019 में इस्तीफा दिया था, क्योंकि गोपी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और प्रतिबंध लगाए जाने के विरोधी थे. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सिविल सर्विस के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए और विभागीय जांच शुरू की. इस्तीफे के बाद कन्नन गोपीनाथन ने सरकार की नीतियों की मीडिया में आलोचना की थी, क्योंकि इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया.
कोरोना काल में ड्यूटी पर लौटने से किया इनकार
कोरोना काल में राज्य सरकार ने उन्हें वापस ड्यूटी जॉइन करने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने वापस आने से इनकार कर दिया तो सरकार ने गोपीनाथन के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने के आरोप में FIR दर्ज कराई, जिसके बाद उनके इस्तीफे का विवाद और उलझ गया. यहां अगर दिव्या मित्तल की बात की जाए तो उनका इस्तीफा स्वीकार करने के रास्ते में कोई अड़चन नहीं है. उनके खिलाफ न कोई विभागीय कार्रवाई चल रही है और न ही कोई अनुशासनात्मक जांच जारी है. उन्होंने 13 साल में किसी नियम का उल्लंघन भी नहीं किया है.
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दिव्या मित्तल को क्या सुविधाएं मिलेंगी क्या नहीं?
IAS अफसर को रिटायरमेंट के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी, भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन रिटायरमेंट से पहले इस्तीफा देने वाले अफसर को सेवा की अवधि, सर्विस जॉइन करने के साल और पेंशन स्कीम के लाभार्थी होने के आधार पर पेंशन मिलती है. दिव्या को उनके प्रोविडेंट फंड (GPF/EPF) का पैसा तब मिलेगा, अगर वे नई पेंशन योजना (NPS) के दायरे में आएंगी. क्योंकि दिव्या 2004 के बाद सिविल सर्विस जॉइन की, इसलिए उन्हें उनके PF खाते में जमा पैसा और पेंशन मिल जाएगी. इस्तीफा मंजूर होने तक पूरा वेतन और भत्ते मिलेंगे. अर्नड लीव का कैश पेमेंट भी उन्हें मिलता रहेगा.
क्योंकि दिव्या मित्तल ने अपनी इच्छा से पद से इस्तीफा दिया है और 20 साल की सेवा अवधि भी पूरी नहीं की है, इसलिए उन्हें रेगुलर पेंशन नहीं मिलेगी. वहीं ग्रेच्युटी भी रिटायरमेंट से पहले इस्तीफा देने के नियमों के आधार पर ही मिलेगी. इसके अलावा इस्तीफा मंजूर होते ही उन्हें सरकारी आवास और सरकारी गाड़ी सरेंडर करनी होगी. IAS अफसर होने के नाते मिलने वाली सिक्योरिटी और अन्य सुविधाएं भी बंद हो जाएंगी. ऐसे में अब देखना यह है कि दिव्या मित्तल का इस्तीफ योगी आदित्यनाथ कब स्वीकार करेगी और उनका इस्तीफा सरकार स्वीकार करेगी भी या नहीं?
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