फ्लाईदुबई फ्लाइट के घायल पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को जिंदा बचाने के लिए 45 मिनट कड़ी मशक्कत की, लेकिन अगर इसके बाद 5 मिनट की देरी होती तो वे जिंदा न बच पाते, क्योंकि खून काफी बह चुका था. इसलिए दूसरे पायलटों को कहा था कि अगर अब लैंडिंग नहीं की गई तो हम कैप्टन को खो देंगे. यह कहना है इजरायल के उस डेंटिस्ट डॉ. शोता मुसाएव का, जिन्होंने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को तब तक जीवित रखा, जब तक कि विमान सुरक्षित लैंडिंग नहीं कर गया. कैप्टन पर उनके को-पायलट हम्माम-अल-हम्मामी ने चाकू से हमला किया था और प्लेन को हाईजैक करने की कोशिश की थी, लेकिन क्रू मेंबर्स और यात्रियों ने हमलावर को बंधकर बनाकर प्लेन को क्रैश होने से बचाया.
घावों के कारण कैप्टन का खून काफी ज्यादा बह गया
47 वर्षीय शोता मूसाएव अपनी पत्नी के साथ चीन से तेल अवीव वाया दुबई सफर कर रहे थे, तभी कॉकपिट के अंदर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आईं और डॉक्टर को बुलाने की बात सुनी. क्योंकि वे डॉक्टर थे तो आवाज सुनते ही तुरंत कॉकपिट की ओर दौड़े. उन्होंने कैप्टन को बुरी तरह घायल देखा, क्योंकि उनके सिर और बाएं हाथ से बहुत खून बह रहा था. उसने तुरंत टी-शर्ट से उनके घावों को दबाया, लेकिन खून बहना बंद नहीं हुआ. फिर केबिन क्रू से बर्फ मांगी. उनके शरीर पर बहुत गहरे घाव थे. लेकिन उन्होंने घावों पर लगातार दबाव बनाए रखा और बार-बार बर्फ लगाई. हर बार जब उन्होंने घावों की जांच करने के लिए पट्टी हटाई तो खून बहना और बढ़ गया. जिससे उनकी जान को खतरा था.
कैप्टन स्मित को होश में रखना सबसे बड़ी चुनौती थी
डॉक्टर मूसाएव ने बताया कि उस समय कैप्टन का खून बहने से रोकना ही चुनौती नहीं था. बल्कि कैप्टन को होश में रखना उससे ज्यादा बड़ी चुनौती थी. मैंने कैप्टन से कहा कि कृपया आना सोना मत, हमें आपकी जरूरत है. इसलिए उनसे बात करता रहा और उनसे पत्नी-बच्चों के नाम पूछे. बातचीत करके उन्हें जगाए रखने का प्रयास किया और उन्हें आश्वस्त किया कि वे अपने परिवार से फिर मिलेंगे. बुरी तरह घायल होने और गहरी चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छार जीवित रहने के लिए बेताब थे. इसलिए कैप्टन ने कह रहे थे कि कृपया मेरी मदद करो. भगवान मेरे साथ हैं. मैं जीना चाहता हूं. मैं यहां मरना नहीं चाहता. उन्होंने बार-बार सिर में तेज दर्द और हाथों में जलन होने की शिकायत की, लेकिन हिम्मत बनाए रखी.
कैप्टन की नब्ज गुम हुई और होंठ भी नीले पड़ गए थे
डॉक्टर ने बताया कि एक समय ऐसा आया, जब कैप्टन मच्छार की हालत अचानक बिगड़ गई. उनकी नब्ज तेजी से धीमी होने लगी थी तो मैंने उनके पैर ऊपर उठाए तो नब्ज सामान्य हो गई. फिर कैप्टन के होंठ नीले पड़ने लगे तो पता चला कि अब ज्यादा समय नहीं बचा है तो एयर होस्टेस से कहा कि हमें जल्दी लैंडिंग करनी होगी. उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा है. दर्द कम करने की दवा नहीं दे सकते थे और उनका खून काफी बह चुका था, वह पीठ के बल लेटे हुए थे, इसलिए डर था कि हिलाने या दवा देने से स्थिति और बिगड़ सकती है. लेकिन भगवान की कृपा से समय रहते तबूक एयरपोर्ट पर लैंडिंग हो गई और सबसे पहले फ्लाइट से कैप्टन को उतारकर मेडिकल इमरजेंसी के साथ अस्पताल पहुंचाया गया.