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देश

30 साल पुराने ‘अंडरवियर’ ने पूर्व मंत्री को पहुंचाया जेल, आरोपी को बचाने के चक्कर में विधायकी भी गंवा बैठे

कोर्ट ने केरल के पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक एंटनी राजू को साल 1990 के एक ड्रग केस में सबूतों के साथ छेड़छाड़ के मामले में तीन साल की सजा सुनाई है.

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Edited By : Arif Khan Updated: Jan 8, 2026 12:22
यह एंटनी राजू के लिए एक बड़ा झटका है, राज्य में इसी साल चुनाव है, और वह चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.

3 जनवरी को तिरुवनंतपुरम की एक कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. केरल के पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक एंटनी राजू को साल 1990 के एक ड्रग केस में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का दोषी ठहराया गया है. उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई है. इसके बाद एंटनी राजू की विधानसभा सदस्यता खुद ही रद्द हो जाएगी. यह एंटनी राजू के लिए एक बड़ा झटका है, राज्य में इसी साल चुनाव है, और वह चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. एंटनी राजू का सियासी करियर खत्म करने की वजह बनी है तीन दशक पुरानी एक ‘अंडरवियर’. आज जानिए, आखिर कैसे एक अंडरवियर ने किसी की विधायकी छीन ली.

ऐसे होती है कहानी शुरू

मामला साल 1990 का है. एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक एंड्रयू सल्वाटोर सेरवेली को तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया जाता है. उसके पास से 61.5 ग्राम नशीला पदार्थ हशीश मिलता. उसने इसे अपने गहरे नीले रंग के अंडरवियर में सिली हुई एक गुप्त जेब में छिपा रखा था. उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाता है. एंटनी राजू बतौर जूनियर एडवोकेट इस केस से जुड़े हुए थे. इस मामले में अभियोजन का पक्ष मजबूत लग रहा था. नशीला पदार्थ सीधे आरोपी से बरामद हुआ था और उस मामले को सबूतों के साथ कोर्ट के सामने अच्छे से पेश किया गया. सेशन कोर्ट ने सेरवेली को दोषी ठहराते हुए और उसे 10 साल की जेल और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुना दी. मामला यहां खत्म हो जाना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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खेल शुरू होता है अब

फिर मामला पहुंचा केरल हाईकोर्ट. सेरवेली के वकील ने कहा कि पुलिस हिरासत में जब्त किया गया अंडरवियर उसका था ही नहीं. उनके वकीलों ने एक अजीब मांग कोर्ट के सामने रख दी कि सेरवेली खुली अदालत में वह अंडरवियर पहनकर यह साबित करने की कोशिश करेगा कि वह उसका नहीं था. कोर्ट के अंदर सेरवेली ने वह अंडरवियर पहनने की कोशिश भी की, लेकिन वह उसे फिट नहीं हुआ. वह अंडरवियर काफी छोटा लग रहा था. इससे अभियोजन पक्ष बैकफुट पर आ गया. कोर्ट इस तर्क पर भरोसा कर फरवरी 1991 में सेरवेली को बरी कर दिया.

सेरवेली ने जेल में कबूला

इसके बाद सेरवेली बरी होकर ऑस्ट्रेलिया लौट जाता है. वर्षों बाद, ऑस्ट्रेलिया में एक हत्या के मामले में सेरवेली को जेल भेज दिया गया. जेल में रहने के दौरान, उसने अपने सह-आरोपी वेस्ले जॉन पॉल को यह बता दिया कि उसके केरल ड्रग केस में हेरफेर किया गया था. उसने उसे बताया कि भारत में अंडरवियर को छोटा करने करने के लिए रिश्वत दी थी. पॉल ने यह जानकारी ऑस्ट्रेलियाई पुलिस को दे दी. ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने इंटरपोल को सतर्क किया, जिसके बाद यह जानकारी भारतीय एजेंसियों तक पहुंची. जिस अधिकारी ने इस मामले की जांच की थी, उसे भी इसका लंबे समय से शक था. क्योंकि उसी अधिकारी ने खुद वह अंडरवियर जब्त किया था. जब सेरवेली को गिरफ्तार किया गया था तो वह उसे फिट आ रहा था.

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दोबारा खुलता है केस

इसके बाद कड़ियों को बारीकी से जोड़ा गया. जिसमें सामने आया कि पूरे मामले में बड़ी चालाकी से हेरफेर करते हुए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है. प्रक्रिया के मुताबिक, दोष साबित होने के बाद केवल उन्हीं वस्तुओं को सौंपा जा सकता है जो कोर्ट के ‘रिलीज ऑर्डर’ में जिनका जिक्र होता है. लेकिन इस केस में अहम सबूत वह अंडरवियर ही एंटनी राजू को सौंप दिया गया था. करीब चार महीने तक एंटनी राजू के पास रहा. हालांकि, फिर राजू ने यह दावा करते हुए अंडरवियर कोर्ट को लौटा दिया था कि यह ‘गलती से’ रिलीज हो गया था.

कैसे किया अंडरवियर को छोटा

फोरेंसिक जांच में बाद में खुलासा हुआ कि इस दौरान अंडरवियर का आकार कम करने के लिए उसमें जानबूझकर और चालाकी से बदलाव किए गए थे. जांच में सामने आया कि अंडरवियर की सिलाई के साथ छेड़छाड़ की गई थी. दोनों तरफ की खड़ी सिलाई और नीचे की क्रॉस सिलाई में धागे के प्रकार और सिलाई के पैटर्न बाकी कपड़ों से काफी अलग था. जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि यह अंडरवियर ऐसा नहीं था, बल्कि इसमें बाद में चेंज किए गए. बदले हुए हिस्सों में हाथ की सिलाई के निशान थे. उखड़े हुए रेशे और गलत अलाइनमेंट था. फिर इस नतीजे पर पहुंचा गया कि इन्हीं चेंजज की वजह से अंडरवियर छोटा हो गया था. और ये चेंजज किए गए तब, जब यह अंडरवियर राजू के पास था.

फिर शुरू होती है राजू की कानूनी लड़ाई

जांच के बाद, केरल उच्च न्यायालय के सतर्कता विभाग ने पूछताछ की. साल 1994 में राजू और कोर्ट के क्लर्क केएस जोस के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. 12 साल बाद, मार्च 2006 में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई. इस दौरान राजू का सियासी कद बढ़ता गया. उन्होंने वकालत से राजनीति में एंट्री मार ली. साल 2021 में ‘जनधिपत्य केरल कांग्रेस’ के उम्मीदवार के रूप में तिरुवनंतपुरम से विधायक चुने गए और एलडीएफ सरकार में परिवहन मंत्री के रूप में कार्य किया.

HC से मिली कुछ पल की राहत

मार्च 2023 में, राजू को तब बड़ी राहत मिली जब उच्च न्यायालय ने तकनीकी आधार पर कार्यवाही रद्द कर दी. कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के सबूतों के साथ छेड़छाड़ से जुड़े अपराधों पर केस केवल कोर्ट की शिकायत पर ही चलाया जा सकता है, पुलिस की शिकायत पर नहीं. लेकिन यह राहत कम समय के लिए थी. राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई, जिसने नवंबर 2024 में हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और ट्रायल फिर से शुरू हो गया.

इसके बाद 3 जनवरी 2026 को मजिस्ट्रेट ने फैसला सुनाया. एंटनी राजू और केएस जोस को दोषी ठहराया गया. राजू को तीन साल के साधारण कारावास की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि जोस को एक साल की सजा मिली है.

First published on: Jan 08, 2026 12:21 PM

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