---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

рджреЗрд╢ angle-right

‘… рддреЛ рд╣рд┐рдВрджреВ рдХреЛ рдЕрдиреБрд╕реВрдЪрд┐рдд рдЬрд╛рддрд┐ рдХрд╛ рджрд░реНрдЬрд╛ рдирд╣реАрдВ рдорд┐рд▓реЗрдЧрд╛’, рдзрд░реНрдо рдкрд░рд┐рд╡рд░реНрддрди рдкрд░ рд╕реБрдкреНрд░реАрдо рдХреЛрд░реНрдЯ рдкрд░ рдмрдбрд╝рд╛ рдлреИрд╕рд▓рд╛

рдзрд░реНрдо рдкрд░рд┐рд╡рд░реНрддрди рдкрд░ рд╕реБрдкреНрд░реАрдо рдХреЛрд░реНрдЯ рдиреЗ рдмрдбрд╝рд╛ рдлреИрд╕рд▓рд╛ рд╕реБрдирд╛рдпрд╛ рд╣реИред рд╕реБрдкреНрд░реАрдо рдХреЛрд░реНрдЯ рдиреЗ рдЖрдВрдзреНрд░ рдкреНрд░рджреЗрд╢ рд╣рд╛рдИрдХреЛрд░реНрдЯ рдХреЗ рдЙрд╕ рдЖрджреЗрд╢ рдХреЛ рдмрд░рдХрд░рд╛рд░ рд░рдЦрд╛, рдЬрд┐рд╕рдореЗрдВ рдХрд╣рд╛ рдЧрдпрд╛ рдерд╛ рдХрд┐ рдИрд╕рд╛рдИ рдзрд░реНрдо рдЕрдкрдирд╛рдХрд░ рд╕рдХреНрд░рд┐рдп рд░реВрдк рд╕реЗ рдЙрд╕реЗ рдорд╛рдирдиреЗ рд╡рд╛рд▓рд╛ рд╡реНрдпрдХреНрддрд┐ рдЕрдиреБрд╕реВрдЪрд┐рдд рдЬрд╛рддрд┐ рдХрд╛ рд╕рджрд╕реНрдп рдирд╣реАрдВ рд░рд╣ рд╕рдХрддрд╛ред рдкрдврд╝рд┐рдП рдкреВрд░реА рд░рд┐рдкреЛрд░реНрдЯред

---рдЦрдмрд░ рдиреАрдЪреЗ рдЬрд╛рд░реА рд╣реИ---

धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं हो सकता। कोर्ट ने फैसला दिया कि मुस्लिम और ईसाई धर्म में परिवर्तित हिंदू को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा और वह SC/ST एक्ट का दावा नहीं कर सकता।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म अपनाकर सक्रिय रूप से उसे मानने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं रह सकता। कोर्ट ने नोट किया कि याचिकाकर्ता ने एक दशक तक ईसाई धर्म का पालन किया और पादरी के रूप में रविवार की प्रार्थनाएं भी आयोजित कीं।

---खबर नीचे जारी है---

यह भी पढ़ें: चुनाव आयोग ने जारी की SIR सप्लीमेंट्री लिस्ट, पश्चिम बंगाल के 29 लाख वोटरों पर आया फैसला

1950 का आदेश क्या है?

अनुसूचित जातियां भारत के संविधान के अनुच्छेद 341 के अंतर्गत परिभाषित हैं। इसके अनुसार, हिंदू धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणी का सदस्य नहीं माना जा सकता। 1950 के राष्ट्रपति आदेश में यह भी कहा गया था कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के दलितों को ही अनुसूचित जाति सूची का सदस्य माना जा सकता है।

---खबर नीचे जारी है---

यह भी पढ़ें: CJI ने चुनाव निकाय नियुक्तियों के मामले से खुद को किया अलग, सामने आई ये वजह

---खबर नीचे जारी है---

First published on: Mar 24, 2026 12:19 PM

End of Article

About the Author

---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---
рд╕рдВрдмрдВрдзрд┐рдд рдЦрдмрд░реЗрдВ
Sponsored Links by Taboola