Hajj Travel 2026 Fare Hike: हज यात्रा पर जाने वाले जायरीन के लिए एक बड़ी खबर है. हज कमेटी ऑफ इंडिया ने इस साल हज यात्रियों के हवाई किराए (Airfare) में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है. सरकार के इस फैसले के बाद देश में सियासत गरमा गई है. एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस ने इस फैसले को मुसलमानों के साथ अन्याय करार दिया है, वहीं केंद्र सरकार ने इसके पीछे वैश्विक कारणों का हवाला दिया है.
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है. ओवैसी ने कहा, “मुंबई एम्बार्केशन पॉइंट से पहले ही यात्रियों से 90 हजार रुपये लिए जा चुके हैं, अब 10 हजार अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं. क्या हज कमेटी नहीं चाहती कि गरीब इंसान भी हज कर सके? सरकार को वसूली बंद कर वसूला गया पैसा तुरंत लौटाना चाहिए.”
सरकार की सफाई: ‘ATF की कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल’
विवाद बढ़ता देख अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि मध्य एशिया में तनाव के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 30 से 40 फीसदी का उछाल आया है. रिजिजू ने कहा, “वास्तव में प्रति यात्री 30 से 40 हजार रुपये की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने हस्तक्षेप किया और इसे सिर्फ 10 हजार रुपये तक सीमित रखा. इस तरह हमने हर यात्री के करीब 200 से 300 डॉलर बचाए हैं.”
विपक्ष ने घेरा, मंत्रालय ने कहा- ‘यह शोषण नहीं मदद है’
कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस फैसले का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और किरण रिजिजू से मुलाकात करेंगे ताकि यात्रियों पर यह बोझ न पड़े. दूसरी ओर, अल्पसंख्यक मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार यात्रियों की भावनाओं का सम्मान करती है.
मंत्रालय के अनुसार, बढ़ी हुई ईंधन कीमतों का अधिकांश भार सरकार खुद उठा रही है ताकि जायरीन को बड़े आर्थिक बोझ से बचाया जा सके. यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और अब तक 1 लाख से अधिक यात्री हज 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं.










