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लोकसभा में रेल सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दे पर सरकार की ओर से आज जवाब दिया गया. आंध्र प्रदेश के सांसद कुंडूरु रघुवीर ने देशभर में ट्रेनों और रेलवे रूट्स पर ‘कवच’ प्रणाली लागू किए जाने को लेकर सरकार से सवाल किया. इसके जवाब में रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है.

सांसद कुंडूरु रघुवीर ने सरकार से पूछा कि क्या स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोधी प्रणाली ‘कवच’ देश की सभी ट्रेनों और रेलवे मार्गों पर लागू कर दी गई है. साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि वर्तमान में कितनी ट्रेनों और कितने किलोमीटर रेलवे मार्ग पर कवच लागू किया जा चुका है, पिछले दो वर्षों में कवच की कमी या विफलता के कारण कोई बड़ा हादसा हुआ है या नहीं, तथा 100 प्रतिशत कवरेज कब तक हासिल किया जाएगा.

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रेलवे में सुरक्षा को लेकर उठाए गए ठोस कदम

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने जवाब में कहा कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा को लेकर लगातार ठोस कदम उठाए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ट्रेन दुर्घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में जहां 135 परिणामी रेल दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक यह संख्या घटकर केवल 12 रह गई है, जो लगभग 90 प्रतिशत की कमी दर्शाती है.

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रेल मंत्री ने दुर्घटना सूचकांक के आंकड़े भी पेश किए. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में दुर्घटना सूचकांक 0.11 था, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 0.03 रह गया है, यानी इसमें लगभग 73 प्रतिशत की कमी आई है. सदन को दी गई जानकारी के अनुसार रेलवे सुरक्षा से जुड़े खर्च में भी लगातार वृद्धि की गई है. वर्ष 2013-14 में जहां सुरक्षा गतिविधियों पर 39,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1,17,693 करोड़ रुपये हो गया है.

रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे में सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी सुधार किए गए हैं. 31 दिसंबर 2025 तक 6,660 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली लागू की जा चुकी है, जबकि 10,097 लेवल क्रॉसिंग गेट्स को इंटरलॉक किया गया है. इसके अलावा 6,665 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. सभी लोकोमोटिव में चालक की सतर्कता बनाए रखने के लिए विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं.

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कोहरे की स्थिति में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जीपीएस आधारित फॉग सेफ्टी डिवाइस लोको पायलटों को उपलब्ध कराए गए हैं. रेलवे ने आधुनिक ट्रैक संरचना, अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन टेस्टिंग, फ्लैश बट वेल्डिंग तकनीक और ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम भी लागू किए हैं. रेल मंत्री ने बताया कि ब्रॉड गेज मार्गों पर सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग जनवरी 2019 तक समाप्त कर दी गई हैं और पारंपरिक आईसीएफ कोचों को एलएचबी कोचों से बदला जा रहा है.

क्या है रेलवे में कवच सिस्टम?

रेल मंत्री ने ‘कवच’ प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह भारत में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो लोको पायलट की सहायता करती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाकर टक्कर की संभावना को रोकती है. यात्री ट्रेनों पर इसका पहला परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू किया गया था, जबकि जुलाई 2020 में इसे राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली घोषित किया गया.

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उन्होंने बताया कि कवच प्रणाली लागू करने के लिए हर स्टेशन पर स्टेशन कवच लगाना, पूरे ट्रैक पर आरएफआईडी टैग स्थापित करना, टेलीकॉम टावर लगाना, ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना और सभी लोकोमोटिव में लोको कवच लगाना आवश्यक होता है.

रेल मंत्री ने कहा कि कवच संस्करण 3.2 को दक्षिण मध्य रेलवे के 1,465 रूट किलोमीटर पर लागू किया गया था. इसके बाद तकनीकी सुधारों के साथ कवच संस्करण 4.0 को 16 जुलाई 2024 को मंजूरी दी गई, जो रेलवे नेटवर्क की विविध आवश्यकताओं को पूरा करता है.

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उन्होंने बताया कि कवच संस्करण 4.0 को अब तक कुल 1,297 रूट किलोमीटर पर लागू किया जा चुका है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर शामिल हैं. दिल्ली-मुंबई मार्ग पर जंक्शन केबिन–पलवल–मथुरा–नागदा सेक्शन में 667 किलोमीटर, वडोदरा–विरार सेक्शन में 336 किलोमीटर तथा वडोदरा–अहमदाबाद सेक्शन में 96 किलोमीटर पर यह प्रणाली लागू की गई है. वहीं दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर गया–सर्मतनर सेक्शन में 93 किलोमीटर और हावड़ा–बर्धमान सेक्शन में 105 किलोमीटर पर कवच लगाया गया है.

कहां तक लागू किया गया कवच सिस्टम?

रेल मंत्री ने सदन को बताया कि वर्तमान में 23,360 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड कवच लागू करने का कार्य जारी है. 30 जनवरी 2026 तक हाई डेंसिटी रेल मार्गों पर 8,570 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है, 938 टेलीकॉम टावर लगाए गए हैं, 767 स्टेशनों पर डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं और 5,672 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड उपकरण लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 4,154 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है.

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सरकार ने 6,300 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में कवच लगाने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं, जबकि 2,679 डीजल लोकोमोटिव के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है. रेलवे ने कवच तकनीक के संचालन के लिए अब तक लगभग 48,000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया है, जिनमें करीब 45,000 लोको पायलट और सहायक लोको पायलट शामिल हैं.

रेल मंत्री ने बताया कि ट्रैक साइड कवच प्रणाली की लागत लगभग 50 लाख रुपये प्रति किलोमीटर है, जबकि लोकोमोटिव में कवच लगाने की लागत करीब 80 लाख रुपये प्रति इंजन है. दिसंबर 2025 तक कवच परियोजना पर 2,573.36 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि वर्ष 2025-26 के लिए 1,673.19 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. सरकार ने आश्वस्त किया कि कवच प्रणाली के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे को शून्य टक्कर संचालन की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है और इसके लिए आवश्यक धनराशि परियोजनाओं की प्रगति के अनुसार उपलब्ध कराई जा रही है.

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First published on: Feb 11, 2026 08:43 PM

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