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असम-अरुणाचल सीमा पर फायरिंग, 18 लोग जख्मी; जानें क्या है विवाद?

असम के धेमाजी जिले में हिंसक झड़प और गोलीबारी हुई, जिसमें कम से कम 18 लोग घायल हो गए. घायलों में से चार की हालत गंभीर बताई जा रही है. यह घटना असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और जमीन पर दावेदारी को लेकर हुई.

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अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे असम के धेमाजी जिले में हिंसक झड़प के दौरान गोलीबारी हुई. इस दौरान कम से कम 18 लोग घायल हुए हैं. घायलों में चार की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और जमीन पर दावेदारी को लेकर तनाव ने हिंसक रूप ले लिया.

बता दें कि असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सीमा को लेकर विवाद 1987 से जारी है. घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शिक्षा मंत्री रानोज पेगू को अरुणाचल प्रदेश के साथ बातचीत कर मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी है. वहीं, गोलीबारी की घटना के बाद असम के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश के अधिकारियों के साथ बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की.

गौर करने वाली बात यह है कि असम और अरुणाचल प्रदेश, दोनों राज्यों में फिलहाल बीजेपी की सरकार है.

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असम और अरुणाचल के बीच गोलीबारी

असम पुलिस के मुताबिक, सोमवार सुबह धेमाजी जिले के गोगमुख रेवेन्यू सर्कल के मिंगमांग बदाती क्षेत्र में फायरिंग की घटना हुई. पुलिस का आरोप है कि अरुणाचल प्रदेश की ओर से आए कुछ लोगों ने असम की सीमा में गोलीबारी की. घटना में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए गोगमुख ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया गया. हालत को देखते हुए 7 घायलों को इलाज के लिए धेमाजी सिविल अस्पताल भेज दिया गया, जबकि चार गंभीर रूप से घायल लोगों को डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया.

यह भी पढ़ें- SIR से जुड़े मामलों का कब होगा निपटारा? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

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सीएम सरमा ने क्या कहा?

वहीं, इस घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का भी बयान सामने आया. उन्होंने कहा, ‘दोनों राज्यों के मुख्य सचिव आपस में बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हालात को सामान्य करने और तनाव घटाने के लिए दोनों राज्यों के पुलिस महानिदेशक भी एक-दूसरे के संपर्क में हैं.’

असम-अरुणाचल सीमा विवाद की क्या है वजह?

असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच करीब 804 किलोमीटर लंबी सीमा है. दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. हाल में हुई झड़प को भी इसी पुराने सीमा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, नॉर्थ-ईस्ट के पुनर्गठन के दौर से ही दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर मतभेद रहे हैं. अरुणाचल प्रदेश को पहले नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) के नाम से जाना जाता था और इसका प्रशासन केंद्र सरकार के अधीन था. इसके बाद इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और साल 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला.

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अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिलने के बाद सीमा से जुड़े मुद्दे के समाधान के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया. समिति ने असम के कुछ क्षेत्रों को अरुणाचल प्रदेश में शामिल करने की सिफारिश की थी. हालांकि, असम ने समिति की इन सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया था. सीमा को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद इसके बाद भी जारी रहा. मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है और यह विवाद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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