एवरेस्ट की हींग पर FSSAI का बड़ा एक्शन, 3 अन्य मसालों में मिली गड़बड़ी; कंपनी से मांगा जवाब

FSSAI ने लैब टेस्ट में फेल होने के बाद एवरेस्ट और लालजी गोधू की हींग की बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी है. जांच में हींग के अंदर जरूरी अर्क की भारी कमी और भारी मात्रा में स्टार्च की मिलावट पाई गई है. वहीं एवरेस्ट के तीन अन्य मसालों में भी नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है.

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FSSAI ने लैब टेस्ट में फेल होने के बाद एवरेस्ट और लालजी गोधू की हींग की बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी है. Photo: News24

मशहूर मसाला ब्रांड एवरेस्ट और लालजी गोधू की हींग इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गुणवत्ता जांच में फेल होने के बाद दोनों कंपनियों की हींग की बिक्री पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है. उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद मुंबई और गुजरात के उमबरगांव स्थित एवरेस्ट की यूनिट से नमूने लिए गए थे. लैब टेस्ट में दोनों कंपनियों के उत्पाद निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे. नियामक ने कंपनियों को बाजार से घटिया उत्पाद वापस मंगाने और आगे के लिए एक्शन प्लान देने का निर्देश दिया है. जब तक नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक यह रोक जारी रहेगी.

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FSSAI की जांच में एवरेस्ट के तीन अन्य लोकप्रिय प्रोडक्ट्स-एग करी मसाला, चिकन मसाला और गरम मसाला में भी नियमों का उल्लंघन पाया गया है. हालांकि, इन तीनों मसालों की बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है.

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जांच में क्या गड़बड़ी सामने आई?

नियमों के अनुसार मिश्रित हींग में कम से कम 5% अल्कोहल में घुलनशील अर्क होना चाहिए. नमूनों में यह मात्र 0 से 3% मिला. इससे साफ हुआ कि 30 से 40% तक कम कच्ची हींग का इस्तेमाल किया जा रहा था. लालजी गोधू की कच्ची हींग की 6 किस्मों में 15 से 32% तक स्टार्च पाया गया, जबकि नियमों के मुताबिक इसकी अधिकतम सीमा केवल 1% तय है.

कंपनी से मांगा स्पष्टीकरण और एक्शन प्लान

फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI ने इस मामले में एवरेस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नियामक ने कंपनी से इन उल्लंघनों पर स्पष्टीकरण मांगा है. साथ ही एवरेस्ट को एक ठोस कार्य योजना पेश करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें यह बताना होगा कि कंपनी भविष्य में अपने सभी प्रोडक्ट्स में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का अनुपालन कैसे सुनिश्चित करेगी.

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पैकेटबंद फूड पर लाल चेतावनी लेबल की तैयारी

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को पैकेटबंद खाने पर नए ‘फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल’ का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत ज्यादा चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट वाले पैकेटों के आगे चमकीला लाल, हेक्सागोनल चेतावनी सिंबल लगाना अनिवार्य करने की योजना है, ताकि ग्राहक सही उत्पाद चुन सकें.

ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ पर सख्ती

खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई से पैकेटबंद मसाला उद्योग में हलचल तेज हो गई है. अधिकारियों का साफ कहना है कि किसी भी ब्रांड को खाने-पीने की चीजों में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. तय मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रोडक्ट्स पर आगे भी नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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