Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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डीआरडीओ ने सोमवार को ओडिशा तट के पास भारत की अपनी ‘लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल’ (LRLACM) का पहला सफल परीक्षण किया है. इस क्रूज़ मिसाइल को अमेरिकी सेना की सबसे भरोसेमंद और घातक ‘टॉमहॉक’ मिसाइल के भारतीय समकक्ष के रूप में देखा जा रहा है. रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में साफ किया है कि इस परीक्षण ने अपने सभी परिचालन और तकनीकी उद्देश्यों को पूरी तरह से हासिल कर लिया है. हालांकि, सेना में इसे औपचारिक रूप से शामिल करने से पहले अभी अगले दो साल तक कुछ और कड़े परीक्षण किए जाएंगे.
हालांकि, सरकार ने अभी तक इस मिसाइल की मारक क्षमताओं पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस स्वदेशी टॉमहॉक की रेंज 1,000 से 1,500 किलोमीटर के बीच है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर इसे सीमा के पास अग्रिम मोर्चों पर तैनात किया जाता है, तो चीन और पाकिस्तान के कई सबसे अहम सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक केंद्र इसकी सीधी मारक दूरी के भीतर आ जाएंगे.
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पश्चिमी मोर्चा पर तैनात किया गया तो इस मिसाइल के दायरे में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद, रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय), लाहौर, फैसलाबाद और पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक व नौसैनिक केंद्र कराची आ सकते हैं.
Long Range Land Attack Cruise Missile (LRLACM) was successfully flight tested from Dr APJ Abdul Kalam Island off the coast of Odisha on 15th June 2026.https://t.co/wVYJauGjNQ pic.twitter.com/nutCCfzWEd
— DRDO (@DRDO_India) June 15, 2026
वहीं, उत्तरी और पूर्वी मोर्चा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनाती के बाद यह मिसाइल चीन के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में स्थित ल्हासा (प्रमुख चीनी सैन्य ढांचा), चेंगदू (बड़ा सैन्य हब), उरुमकी और कुनमिंग जैसे रणनीतिक शहरों को आसानी से निशाना बना सकती है.
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ऑपरेशन सिंदूर, रूस-यूक्रेन संघर्ष और हालिया ईरान युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक लड़ाई में दूर से सटीक वार करने वाले ‘स्टैंड-ऑफ’ हथियारों की कितनी बड़ी भूमिका है. इस लिहाज से LRLACM भारतीय सेना की ताकत में अभूतपूर्व इजाफा करेगी.
इस मिसाइल और इसके सभी सब-सिस्टम को कई डीआरडीओ लैब्स ने भारतीय उद्योग भागीदारों के साथ मिलकर पूरी तरह ‘देसी’ तरीके से बनाया है, जिसमें बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट इसकी नोडल लैब है. यह मिसाइल पुराने ‘निर्भय’ कार्यक्रम का एक बेहद उन्नत और अपग्रेडेड रूप है.
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इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुमुखी प्रतिभा है. इसे जमीन पर मौजूद मूवेबल लॉन्चर्स, युद्धपोतों और पनडुब्बियों तीनों जगहों से दागा जा सकता है. इसके साथ ही यह पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है.
वहीं, आम बैलिस्टिक मिसाइलें पहले अंतरिक्ष में जाती हैं और फिर नीचे आती हैं, जिससे रडार उन्हें पकड़ लेते हैं. इसके उलट, यह सबसोनिक क्रूज़ मिसाइल जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए इसका पता लगाना और इसे हवा में मार गिराना लगभग नामुमकिन हो जाता है.
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अमेरिका की ‘टॉमहॉक’ मिसाइल साल 1983 से अमेरिकी नौसेना की रीढ़ रही है और इसने 1991 के खाड़ी युद्ध से लेकर हाल के ईरान युद्ध तक हर संघर्ष में अपनी ताकत दिखाई है, जहां तेहरान के अंदर सटीक हमलों के लिए 49 टॉमहॉक दागे गए थे. अमेरिकी टॉमहॉक का सबसे अपग्रेड वर्जन हवा में मंडराने और उड़ान के दौरान ही अपना रास्ता या टारगेट बदलने की क्षमता रखता है. यही वजह थी कि पिछले साल यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी इसे अमेरिका से हासिल करने के लिए बेताब थे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी. अब भारत ने इसी तकनीक की तर्ज पर अपनी खुद की अचूक गाइडेड स्वदेशी मिसाइल तैयार कर ली है.
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