Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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पूरे विश्व में हथियारों की ट्रैकिंग करने वाली दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में भारत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक दावा किया गया है. SIPRI ईयरबुक 2026 के मुताबिक, भारत ने अपनी दशकों पुरानी रक्षा रणनीति को बदलते हुए इतिहास में पहली बार 12 परमाणु हथियारों को ‘ऑपरेशनली तैनात’ यानी रेडी-टू-फायर मोड में रखा है.
यह कदम नई दिल्ली की उस पारंपरिक नीति से उलट माना जा रहा है, जिसके तहत शांति काल में परमाणु बमों और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलों या विमानों को अलग-अलग भंडारों में सुरक्षित रखा जाता था.
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रक्षा मामलों में परमाणु हथियारों को दो कैटेगरी में बांटा जाता है, एक ‘स्टॉकपाइल्ड’ और दूसरा ‘डिप्लॉयड’. स्टॉकपाइल्ड में परमाणु हथियारों को अलग और सुरक्षित ठिकानों पर रिजर्व में रखा जाता है. आपातकाल के समय इन्हें निकालकर मिसाइल या विमानों से जोड़ने में वक्त लगता है. डिप्लॉयड का मतलब है कि परमाणु हथियारों को सीधे डिलीवरी सिस्टम पर लगा दिया गया. ये हथियार तत्काल या बेहद कम समय के नोटिस पर दागने के लिए बिल्कुल तैयार होते हैं.
सिपरी की जारी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में भारत के कुल परमाणु हथियारों के भंडार में भी मामूली इजाफा दर्ज किया गया है. जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास अब परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़कर 190 हो गया है.
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ये सभी हथियार भारत के तीनों अंगों यानी परमाणु त्रिशूल को सौंपे गए हैं, जिनमें वायुसेना के लड़ाकू विमान, थलसेना की लैंड-बेस्ड मिसाइलें और नौसेना की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं.
सिपरी की यह रिपोर्ट एक चिंताजनक वैश्विक प्रवृत्ति की ओर भी इशारा करती है, जहां दुनिया भर के देश राष्ट्रीय शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं. जनवरी 2026 तक, दुनिया भर में मौजूद कुल 12,187 परमाणु बमों में से 4,012 न्यूक्लियर वॉरहेड मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर पूरी तरह मुस्तैद हैं. तैनात हथियारों के मामले में रूस (1,796) और अमेरिका (1,770) सबसे आगे हैं. इसके बाद फ्रांस के पास 280 और ब्रिटेन के पास 120 तैनात हथियार हैं.
चीन ने अपनी तैनाती को तेजी से बढ़ाते हुए 34 कर लिया है, जो पिछले साल 24 था. वहीं, माना जाता है कि पाकिस्तान अपना परमाणु भंडार तो बढ़ा रहा है, लेकिन शांति काल में उसके पास कोई भी ‘ऑपरेशनली तैनात’ वॉरहेड नहीं है.
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अमेरिका और रूस की तरह भारत अपने परमाणु हथियारों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता. लेकिन सिपरी की रिपोर्ट अनुमान के आधार पर तैयार की गई है.
इस बड़े रणनीतिक बदलाव के बाद भी यह माना जा रहा है कि भारत अपनी मूल परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ पर पूरी तरह कायम है. भारत की नीति स्पष्ट है कि वह किसी भी देश पर पहला परमाणु हमला नहीं करेगा. अगर भारतीय क्षेत्र या दुनिया में कहीं भी भारतीय सेनाओं पर कोई परमाणु हमला होता है, तो भारत उसका अत्यंत विनाशकारी और अचूक जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है.
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